मतदाता सूची में कथित हेरफेर को लेकर केजरीवाल का दावा; पुरानी मतदाता सूचियां बहाल करने और कई राज्यों में दोबारा चुनाव कराने की मांग
मतदाता सूची में कथित हेरफेर को लेकर केजरीवाल का दावा; पुरानी मतदाता सूचियां बहाल करने और कई राज्यों में दोबारा चुनाव कराने की मांग
खबर खास | नई दिल्ली
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को केंद्र की भारतीय जनता पार्टी नीत सरकार पर मतदाता सूचियों में कथित हेरफेर के जरिए चुनाव जीतने का आरोप लगाया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग भी की। केजरीवाल ने यह आरोप एक हालिया मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए लगाए।
आम आदमी पार्टी मुख्यालय में राज्यसभा सांसद संजय सिंह और दिल्ली आम आदमी पार्टी अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए केजरीवाल ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट से चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर उनकी पार्टी की ओर से लंबे समय से लगाए जा रहे आरोपों को बल मिला है।
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि चुनावी नतीजों को प्रभावित करने के लिए मतदाता सूची में अवैध तरीके से नाम जोड़े और हटाए जा रहे हैं। उन्होंने इसे स्वतंत्र भारत का सबसे बड़ा घोटाला बताया और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तथा चुनाव आयोग के कामकाज की व्यापक जांच की मांग की।
आप प्रमुख ने कहा कि चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त के अलावा दो अन्य चुनाव आयुक्त होते हैं और फैसले सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर लिए जाते हैं। उनका आरोप है कि आयोग के सभी सदस्यों की मंजूरी के बिना कई आधिकारिक पत्र और निर्देश जारी किए गए।
केजरीवाल ने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के कथित पत्राचार का हवाला देते हुए दावा किया कि आयोग के भीतर कुछ मामलों में बिना औपचारिक मंजूरी के आदेश जारी किए जाने को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। उनके अनुसार, महत्वपूर्ण फैसले पर्याप्त विचार-विमर्श या मंजूरी के बिना लिए गए।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों और रिपोर्ट की व्याख्या पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि लिखित टिप्पणियां, सुझाव और अलग-अलग विचार उसकी आंतरिक प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं। आयोग के अनुसार, आधिकारिक आदेश और फैसले कानूनी प्रक्रिया के तहत तथा पूर्ण आयोग के निर्णय से लिए गए हैं।
केजरीवाल ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया उचित मंजूरी के बिना शुरू की गई और इसके तहत किए गए मतदाता सूची में बदलावों को रद्द किया जाना चाहिए। उन्होंने तीन साल पहले की मतदाता सूची बहाल करने की मांग की।
आप प्रमुख ने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय स्तर पर निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों के पास पहले मौजूद मतदाता सूची प्रबंधन की शक्तियों को सीमित किया गया है और मतदाता सूची प्रबंधन की पहुंच को केंद्रीकृत किया गया। उन्होंने दावा किया कि इससे मतदाता सूचियों में अनधिकृत बदलाव की संभावना बढ़ी है।
केजरीवाल ने मांग की कि तीन साल पहले की मतदाता सूचियां बहाल की जाएं और दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में नए सिरे से विधानसभा चुनाव कराए जाएं।
केजरीवाल ने कहा कि मतदाता सूची में कथित अनियमितताएं लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय हैं और इस पर तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने कहा है कि उसके सभी आधिकारिक फैसले कानूनी प्रक्रिया और पूर्ण आयोग की मंजूरी के तहत लिए गए हैं।
इस पूरे मामले में आम आदमी पार्टी की ओर से लगाए गए आरोप राजनीतिक दावे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयोग ने आरोपों के कई पहलुओं को खारिज करते हुए अपनी आंतरिक प्रक्रिया और निर्णय लेने की व्यवस्था का स्पष्टीकरण दिया है। इसलिए आरोपों और आयोग के जवाब को अलग-अलग संदर्भ में देखना जरूरी है।
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