'कॉकरोच पार्टी पाकिस्तान' नाम से चल रहे अभियान ने भ्रष्टाचार, आर्थिक संकट और शासन व्यवस्था को बनाया मुद्दा , संगठन विस्तार की तैयारी के बीच लोकप्रियता और वास्तविक जनसमर्थन पर उठ रहे सवाल
'कॉकरोच पार्टी पाकिस्तान' नाम से चल रहे अभियान ने भ्रष्टाचार, आर्थिक संकट और शासन व्यवस्था को बनाया मुद्दा , संगठन विस्तार की तैयारी के बीच लोकप्रियता और वास्तविक जनसमर्थन पर उठ रहे सवाल
इस्लामाबाद, 1 अगस्त
भारत में चर्चा का विषय बने 'कॉकरोच जनता पार्टी' अभियान की तर्ज पर अब पाकिस्तान में भी 'कॉकरोच पार्टी पाकिस्तान' नाम से एक सोशल मीडिया अभियान तेजी से सुर्खियां बटोर रहा है। यह समूह भ्रष्टाचार, खराब शासन व्यवस्था, आर्थिक संकट और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहा है। सोशल मीडिया पर इसकी बढ़ती सक्रियता ने पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।
समूह का दावा है कि उसका मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान में आर्थिक और राजनीतिक स्थिरता स्थापित करना, शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाना, ऊर्जा संकट का समाधान करना और पानी की कमी जैसी गंभीर समस्याओं से निपटना है। अभियान का नारा है, "पाकिस्तान इसके लोगों का है, भ्रष्ट माफियाओं का नहीं।" समूह खुद को युवाओं की ओर से संचालित एक ऐसे आंदोलन के रूप में प्रस्तुत करता है, जो एकता, पारदर्शिता और बदलाव की बात करता है।
इंस्टाग्राम पर इस अभियान के आधिकारिक खाते को एक लाख 12 हजार से अधिक लोग फॉलो कर रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह खाता मई महीने में बनाया गया था और इसे कनाडा से संचालित किया जा रहा है। इसी महीने इस खाते को सत्यापित (वेरिफाइड) भी किया गया है।
सोशल मीडिया अभियान तक सीमित रहने के बजाय समूह अब संगठनात्मक विस्तार की दिशा में भी कदम बढ़ाता दिखाई दे रहा है। 'कॉकरोच पार्टी पाकिस्तान' ने विभिन्न पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं, जिससे संकेत मिलता है कि वह भविष्य में एक संगठित राजनीतिक मंच के रूप में खुद को स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।
हाल ही में जारी अपने घोषणापत्र में समूह ने कहा है कि वह आम पाकिस्तानियों, विशेष रूप से युवाओं की आवाज बनना चाहता है। घोषणापत्र में भ्रष्टाचार, परिवारवाद की राजनीति और ऐसी व्यवस्था का विरोध किया गया है, जिसमें कुछ चुनिंदा लोगों को ही अधिक लाभ मिलता है। संगठन ने पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक सुधारों को बढ़ावा देने का वादा करते हुए रोजगार सृजन, शिक्षा, बेहतर प्रशासन और ऊर्जा संकट के समाधान को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है।
हालांकि, सोशल मीडिया पर तेजी से बढ़ रही लोकप्रियता के बावजूद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस अभियान को जमीनी स्तर पर कितना जनसमर्थन प्राप्त है और क्या यह ऑनलाइन समर्थन को वास्तविक राजनीतिक प्रभाव में बदल पाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे अभियानों का उभरना पाकिस्तान में लंबे समय से जारी राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और शासन व्यवस्था को लेकर जनता की बढ़ती नाराजगी को भी दर्शाता है। पाकिस्तान की सैन्य-राजनीतिक व्यवस्था के आलोचकों का आरोप है कि नागरिक मामलों में लगातार सैन्य हस्तक्षेप के कारण लोकतांत्रिक संस्थाएं और जवाबदेही की व्यवस्था कमजोर हुई है।
आलोचकों ने सेना प्रमुख असीम मुनीर, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और व्यापक नागरिक-सैन्य व्यवस्था पर महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक कमियों जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकाल पाने के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि इससे सत्ता कुछ प्रभावशाली राजनीतिक और संस्थागत समूहों तक सीमित होकर रह गई है।
इसी बीच पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में वह कहते सुनाई देते हैं कि आज किसी नौजवान को चाहे जो कह दिया जाए, लेकिन यदि ये तथाकथित "कॉकरोच" एकजुट हो गए तो वे पूरी व्यवस्था को बदल सकते हैं। पाकिस्तान आर्थिक सम्मेलन में दिए गए अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था पूरी तरह कमजोर हो चुकी है और केवल बड़े सुधारों के जरिए ही देश की समस्याओं का समाधान संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के लोग ऐसी न्याय व्यवस्था चाहते हैं, जहां सभी को समान अवसर मिले, मेहनत का सम्मान हो और स्थानीय सरकारों को अधिक अधिकार दिए जाएं।
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