मीरी-पीरी खालसा मार्च के दौरान सिख कौम की एकता, जनसंख्या, नशामुक्ति और गुरु साहिबान की शिक्षाओं से युवाओं को जोड़ने पर दिया जोर
मीरी-पीरी खालसा मार्च के दौरान सिख कौम की एकता, जनसंख्या, नशामुक्ति और गुरु साहिबान की शिक्षाओं से युवाओं को जोड़ने पर दिया जोर
फरीदकोट, 1 अगस्त
श्री अकाल तख्त साहिब से तख्त श्री दमदमा साहिब तक निकाले जा रहे मीरी-पीरी खालसा मार्च के दौरान फरीदकोट पहुंचे जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने सिख समुदाय की एकता और भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सिख कौम की संख्या और ताकत को बनाए रखने के लिए प्रत्येक सिख दंपति को कम से कम तीन बच्चे पैदा करने चाहिए। उनका कहना था कि वर्तमान समय में कौम का संगठित और मजबूत बने रहना सबसे बड़ी आवश्यकता है तथा चढ़दी कला की भावना के साथ ही सिख अपनी पहचान, शक्ति और गौरव को कायम रख सकते हैं।
श्री अकाल तख्त साहिब, अमृतसर से शुरू हुआ मीरी-पीरी खालसा मार्च शुक्रवार को फरीदकोट पहुंचा, जहां संगत ने फूल बरसाकर और जयकारों के साथ इसका भव्य स्वागत किया। विभिन्न सिख जत्थेबंदियों ने मार्च का नेतृत्व कर रहे जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज को सिरोपा भेंट कर सम्मानित भी किया।
24 जुलाई 2026 को शुरू हुई यह यात्रा 3 अगस्त 2026 को तख्त श्री दमदमा साहिब में संपन्न होगी। मार्च का उद्देश्य छठे पातशाह श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी के मीरी-पीरी सिद्धांत, सिख कौम की एकता और श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है। यात्रा के दौरान संगत को श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप के साथ-साथ श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी के पावन शस्त्रों के भी दर्शन कराए जा रहे हैं।
यह मार्च गुरुवार देर शाम फरीदकोट पहुंचा था। रात्रि विश्राम के बाद शुक्रवार सुबह गुरुद्वारा खालसा दीवान से इसकी अगली यात्रा शुरू हुई। फरीदकोट शहर के अलावा संधवां, कोटकपूरा, ढिलवां कलां, बहिबल कलां और बरगाड़ी सहित कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक मार्च का स्वागत किया।
इस दौरान जत्थेदार गड़गज्ज ने पंजाब में बढ़ती नशे की समस्या पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखना केवल सरकार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने संगत से युवाओं को दाढ़ी-केश धारण करने, गुरु साहिबान की शिक्षाओं से जुड़ने और सिख परंपराओं को अपनाने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
उन्होंने यह भी कहा कि सिख कौम को पंथ विरोधी ताकतों और उनकी कथित साजिशों के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता है। उनके अनुसार, एकजुटता, धार्मिक मूल्यों के प्रति आस्था और गुरु साहिबान की शिक्षाओं का पालन ही समाज को मजबूत बनाए रखने का सबसे प्रभावी मार्ग है। उन्होंने संगत से अपने स्तर पर युवाओं को सही दिशा देने और नशामुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील भी की।
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