अंबानी परिवार ने बरकरार रखा पहला स्थान, अडानी दूसरे और मित्तल-बिड़ला शीर्ष चार में
अंबानी परिवार ने बरकरार रखा पहला स्थान, अडानी दूसरे और मित्तल-बिड़ला शीर्ष चार में
खबर खास | नई दिल्ली
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाला अंबानी परिवार 2026 में भारत का सबसे अमीर कारोबारी परिवार बना हुआ है। यह जानकारी बार्कलेज प्राइवेट क्लाइंट्स हुरुन इंडिया मोस्ट वैल्यूएबल फैमिली बिजनेसेज लिस्ट की ताजा रिपोर्ट में सामने आई है।
हालांकि अंबानी परिवार की संपत्ति में 8.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, इसके बावजूद परिवार की अनुमानित कुल संपत्ति 25.8 लाख करोड़ रुपये रही और वह रैंकिंग में मजबूती से पहले स्थान पर बना रहा।
अहमदाबाद के उद्योगपति गौतम अडानी भारत के सबसे अमीर पहली पीढ़ी के उद्यमी के रूप में उभरे हैं। अडानी परिवार की अनुमानित संपत्ति 19.6 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है।
रिपोर्ट में टेलीकॉम कंपनी एयरटेल के प्रमोटर सुनील भारती मित्तल को 12.1 लाख करोड़ रुपये की पारिवारिक संपत्ति के साथ तीसरे स्थान पर रखा गया है। वह देश के दूसरे सबसे अमीर पहली पीढ़ी के कारोबारी परिवार भी हैं।
कुमार मंगलम बिड़ला 8.14 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित संपत्ति के साथ चौथे स्थान पर रहे।
हुरुन इंडिया के संस्थापक और मुख्य शोधकर्ता अनस रहमान जुनैद ने कहा कि भारत के सबसे मूल्यवान पारिवारिक कारोबारों की संयुक्त कीमत 1.46 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 138 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
उन्होंने कहा कि अगर इन पारिवारिक कारोबारों को एक अलग देश माना जाए तो यह सकल घरेलू उत्पाद के आधार पर दुनिया की 18वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होती। इसकी अर्थव्यवस्था नीदरलैंड, सऊदी अरब, स्विट्जरलैंड और पोलैंड जैसे देशों से बड़ी होती।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत के शीर्ष 300 पारिवारिक कारोबारों ने पिछले दो वर्षों में हर दिन औसतन 4,076 करोड़ रुपये की कीमत जोड़ी है। यह देश के परिवार-स्वामित्व वाले कारोबारों की मजबूत विकास गति को दर्शाता है।
शाही एक्सपोर्ट्स के आहूजा परिवार ने पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक मूल्य वृद्धि दर्ज की। परिवार की संपत्ति 352 प्रतिशत बढ़कर 37,500 करोड़ रुपये हो गई।
वहीं, गारवेयर हाई-टेक फिल्म्स से जुड़े शशिकांत भालचंद्र गारवेयर परिवार ने भी रैंकिंग में शानदार प्रदर्शन किया। परिवार 61 पायदान ऊपर पहुंचा, जो इस सूची में सबसे तेज रैंक सुधार है। इस दौरान परिवार की संपत्ति 300 प्रतिशत बढ़कर 15,600 करोड़ रुपये हो गई।
रिपोर्ट भारत के कॉरपोरेट परिदृश्य में बड़े परिवार-नियंत्रित कारोबारों के लगातार दबदबे को रेखांकित करती है। साथ ही, यह कई पहली पीढ़ी के उद्यमी कारोबारी समूहों के तेजी से उभरने को भी दर्शाती है।
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