एनएचएआई का कार्य सराहा, दो दिवसीय ट्रेनिंग सेशन का किया गया आयोजन
एनएचएआई का कार्य सराहा, दो दिवसीय ट्रेनिंग सेशन का किया गया आयोजन
खबर खास, शिमला :
हिमाचल प्रदेश PWD की टीम ने NHAI के कार्यों से प्रभावित होकर कालका-सोलन फोरलेन पर चल रहे स्लोप प्रोटेक्शन कार्य का अध्ययन किया। PWD की टीम के लिए दो दिवसीय ट्रेनिंग सेशन का आयोजन किया गया था। इस दौरान PWD की टीम ने समझा की पहाड़ों में स्लोप प्रोटेक्शन का कार्य कितना महत्वपूर्ण है, और साथ ही स्लोप प्रोटेक्शन का कार्य किस प्रकार से किया जाता है। वहीं, टीम ने स्लोप प्रोटेक्शन में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और तकनीक के बारे में भी समझा।
पहले दिन शिमला जोन के अधिकारी ट्रेनिंग सेशन में मौजूद रहे, वहीं दूसरे दिन मंडी, कांगड़ा और हमीरपुर जोन के अधिकारियों ने ट्रेनिंग में भाग लिया। ट्रेनिंग के दौरान NHAI ने PWD अधिकारियों को साइट विजिट और प्रेजेंटेशन के माध्यम से स्लोप प्रोटेक्शन का महत्व और तकनीक से रूबरू करवाया।
शिमला जोन से ट्रेनिंग में पहुंचे असिस्टेंट इंजीनियर साहिल राणा ने बताया कि वह NHAI द्वारा किए जा रहे स्लोप प्रोटेक्शन कार्य का अध्ययन करने के लिए पहुंचे है। बीते कुछ समय में हो रही अधिक बारिश से पहाड़ों में भूस्खलन की समस्या बढ़ी है, इससे पहाड़ों को बचाने और सड़कों पर ट्रैफिक को सुचारू रखने के लिए NHAI स्लोप प्रोटेक्शन कर रहा है, जो बहुत सफल रहा है। इसी कार्य की तकनीक को समझने के लिए PWD की टीम अध्ययन करने पहुंची है।
वहीं, कांगड़ा जोन के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर नरेंद्र चौधरी ने बताया कि NHAI द्वारा स्लोप प्रोटेक्शन कार्य पर ट्रेनिंग सेशन का आयोजन किया गया है, जो सराहनीय है। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में ढलानों पर NHAI द्वारा बेहतर तकनीकि से स्लोप प्रोटेक्शन का कार्य किया जा रहा है, जो बहुत सफल रहा है। प्रदेश में सड़कों के रखरखाव और पहाड़ों को स्टेबल करने के लिए इस तकनीक का उपयोग कारगर साबित हो सकता है।
बता दें कि NHAI के कार्यों से प्रभावित हो कर दिसंबर 2025 की शुरुआत में उत्तराखंड पीडब्ल्यूडी के सेक्रेटरी डॉ. पंकज कुमार पांडे, इंजीनियर इन, चीफ इंजीनियर और अन्य अधिकारियों की टीम के साथ हिमाचल प्रदेश में चल रहे NHAI के कार्यों का दौरा करने पहुंचने थे। इस दौरान उन्होंने पहाड़ों में बनाई जाने वाली सड़कें, स्लोप प्रोटेक्शन, टनल और पुलों के निर्माण के बारे में अध्ययन किया था। NHAI के कार्यों से प्रभावित होकर उन्होंने उत्तराखंड राज्य में भी इस तकनीक को अपनाने की बात कही थी।
क्या है स्लोप प्रोटेक्शन कार्य
स्लोप प्रोटेक्शन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसका उपयोग पहाड़ी और ढलानदार इलाकों में भूस्खलन को रोकने के लिए किया जाता है। इसमें विभिन्न इंजीनियरिंग और बायो-इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग करके कमजोर ढलानों को मजबूत और स्थिर बनाया जाता है। आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली विधियों में ढलान को स्टील की जाली, जूट की चटाई और हाइड्रोसीडिंग के साथ जोड़ा जाता है, जिससे वनस्पति की वृद्धि और लंबे समय तक ढलान की स्थिरता बनी रहती है।
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