पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मामले को उचित बेंच को सौंपा; याचिकाकर्ताओं ने कहा—संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ है व्यवस्था
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मामले को उचित बेंच को सौंपा; याचिकाकर्ताओं ने कहा—संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ है व्यवस्था
ख़बर ख़ास | हरियाणा
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में चंडीगढ़ में असम टेनेंसी एक्ट, 2021 के विस्तार को लेकर दायर याचिका पर सोमवार को अहम सुनवाई हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने इसे आगे विचार के लिए उचित बेंच को संदर्भित कर दिया। इस दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता Chetan Mittal ने कानून के प्रावधानों पर कड़ी आपत्ति जताई।
मित्तल ने अदालत को बताया कि इस कानून के तहत ‘रेंट अथॉरिटी’ और अपीलीय शक्तियां उन कार्यपालक अधिकारियों को सौंप दी गई हैं, जो पहले से ही प्रशासनिक जिम्मेदारियों से बोझिल हैं। उनका कहना था कि तहसीलदारों और अतिरिक्त उपायुक्तों जैसे राजस्व अधिकारियों को न्यायिक अधिकार देना न केवल व्यावहारिक रूप से कठिन है, बल्कि यह स्थापित संवैधानिक सिद्धांतों के भी विपरीत है।
इस मामले की सुनवाई शील नागू की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष हुई, जहां याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि न्यायिक और कार्यपालक शक्तियों के बीच स्पष्ट विभाजन लोकतांत्रिक व्यवस्था का मूल आधार है। ऐसे में इन शक्तियों का एक ही हाथ में केंद्रित होना न्याय की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर सकता है।
याचिका में यह भी कहा गया कि संबंधित अधिकारियों के पास पहले से ही कई प्रशासनिक कार्य हैं, जिसके चलते वे न्यायिक मामलों पर पर्याप्त समय और ध्यान नहीं दे पाएंगे। इससे आम नागरिकों को न्याय मिलने में देरी और जटिलताएं बढ़ सकती हैं।
हाईकोर्ट द्वारा मामले को उचित बेंच को भेजे जाने के बाद अब इस पर विस्तृत सुनवाई की उम्मीद जताई जा रही है। यह मामला न केवल चंडीगढ़ बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी न्यायिक और प्रशासनिक शक्तियों के संतुलन को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।
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