रिकॉर्ड 17,405 मेगावाट बिजली मांग के बीच विरोध तेज, कांग्रेस और किसानों का प्रदर्शन; पावरकॉम के नए CMD बने गुरकीरत किरपाल सिंह
रिकॉर्ड 17,405 मेगावाट बिजली मांग के बीच विरोध तेज, कांग्रेस और किसानों का प्रदर्शन; पावरकॉम के नए CMD बने गुरकीरत किरपाल सिंह
पंजाब में बिजली कटौती को लेकर हालात लगातार गरमाते जा रहे हैं। बिजली संकट से परेशान किसान, उद्योगपति और आम लोग सड़कों पर उतर आए हैं, वहीं राजनीतिक दलों ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बढ़ते विरोध के बीच पंजाब सरकार ने पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के सीएमडी आईएएस बसंत गर्ग को पद से हटा दिया है। उनकी जगह गुरकीरत किरपाल सिंह को नया सीएमडी नियुक्त किया गया है।
हालांकि, बढ़ते विरोध के बीच बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने दावा किया है कि राज्य में बिजली संकट पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है। मंत्री के मुताबिक 13 सितंबर सुबह सात बजे के बाद बिजली की कमी के कारण कोई कट नहीं लगाया गया है और आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक तथा कृषि क्षेत्र को बिजली की आपूर्ति की जा रही है।
सौंद ने बताया कि दो निजी थर्मल पावर प्लांटों में आई तकनीकी खराबियों को दूर कर लिया गया है, जबकि एक अन्य निजी प्लांट से करीब 100 मेगावाट बिजली मिलनी शुरू हो गई है। किसानों को सिंचाई के लिए पहले दिए जा रहे आठ घंटे की बजाय 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने का भी दावा किया गया है।
बिजली मंत्री ने राज्य में बिजली संकट के लिए केंद्र सरकार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कोयले की आपूर्ति में कटौती और पंजाब के हिस्से की करीब 1,000 मेगावाट बिजली नहीं मिलने के कारण संकट पैदा हुआ। मंत्री ने कहा कि पंजाब के पास करीब 17,000 मेगावाट तक की बिजली मांग को पूरा करने की क्षमता है।
दूसरी ओर, बिजली संकट को लेकर विपक्ष और किसान संगठनों का विरोध लगातार तेज हो रहा है। सोमवार को पटियाला में पावरकॉम मुख्यालय की ओर बढ़ रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया।
जगरांव में किसानों ने करीब चार घंटे तक धरना देने के बाद जगरांव-जालंधर मार्ग को जाम कर दिया। वहीं फरीदकोट में भी किसानों ने पावरकॉम कार्यालय का घेराव कर बिजली आपूर्ति को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया।
लुधियाना में बिजली कटौती से परेशान डाइंग उद्योग से जुड़े उद्योगपतियों ने वर्धमान चौक पर लुधियाना-चंडीगढ़ रोड जाम कर दिया। उद्योगपतियों ने आरोप लगाया कि उन्हें रोजाना करीब 14 घंटे तक बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि बिजली संकट के कारण कई श्रमिक फैक्टरियां छोड़कर जा रहे हैं।
उद्योगपतियों ने बिजली की दरों में बढ़ोतरी का भी दावा किया है। उनके मुताबिक बिजली की कीमत करीब आठ रुपये प्रति यूनिट से बढ़कर 9.50 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच गई है, जबकि एक फैक्टरी का मासिक बिजली बिल 15 लाख रुपये से बढ़कर करीब 18 लाख रुपये तक पहुंच गया है।
इस बीच सोमवार को पंजाब में बिजली की मांग 17,405 मेगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। हालांकि, इससे पहले 18 जुलाई को 17,452 मेगावाट की सर्वाधिक मांग दर्ज की जा चुकी है। मांग के दबाव के बीच राज्य में करीब 1,478 मेगावाट उत्पादन क्षमता प्रभावित रही। रोपड़, लहरा मोहब्बत और तलवंडी साबो थर्मल प्लांट की कुछ इकाइयां कम क्षमता पर चलीं, जबकि पानी की कमी के कारण हाइडल पावर की पांच इकाइयां बंद रहीं।
पावरकॉम के अनुसार, उत्पादन क्षमता प्रभावित होने के बावजूद उद्योगों, शहरों और गांवों में बिजली कटौती नहीं की गई। हालांकि, सड़क पर उतर रहे किसानों और उद्योगपतियों के विरोध ने पंजाब में बिजली संकट को लेकर सियासी तापमान जरूर बढ़ा दिया है। अब सरकार के सामने बिजली आपूर्ति सामान्य बनाए रखने के साथ-साथ बढ़ते जन असंतोष को शांत करने की बड़ी चुनौती है।
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