घटती जन्म दर और बढ़ती बुजुर्ग आबादी के बीच शंघाई का बड़ा कदम, महिलाओं को मिलेगा मातृत्व सेवाओं का पूरा खर्च
घटती जन्म दर और बढ़ती बुजुर्ग आबादी के बीच शंघाई का बड़ा कदम, महिलाओं को मिलेगा मातृत्व सेवाओं का पूरा खर्च
चीन के प्रमुख शहर शंघाई ने घटती जन्म दर और तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी की चुनौती से निपटने के लिए मातृत्व सेवाओं को पूरी तरह मुफ्त करने की घोषणा की है। नई नीति के तहत गर्भावस्था के दौरान होने वाली जांच से लेकर अस्पताल में प्रसव और डिलीवरी के बाद 42 दिनों तक की देखभाल पर आने वाला व्यक्तिगत खर्च सरकार की ओर से कवर किया जाएगा।
शंघाई की नगर स्वास्थ्य व्यवस्था के मुताबिक अक्टूबर से शहर की मेडिकल इंश्योरेंस योजना में शामिल सभी महिलाओं को 4,500 युआन यानी करीब 671 अमेरिकी डॉलर का मातृत्व भत्ता दिया जाएगा। यदि इलाज और देखभाल का खर्च इस राशि से अधिक होता है, तो अतिरिक्त रकम मातृत्व बीमा के तहत वहन की जाएगी। इसमें प्रसव पूर्व जांच, अस्पताल में डिलीवरी और प्रसव के बाद 42 दिनों तक की देखभाल शामिल होगी।
शंघाई का यह फैसला ऐसे समय आया है जब चीन गंभीर जनसांख्यिकीय संकट से जूझ रहा है। देश में जन्म दर लगातार घट रही है, कामकाजी उम्र की आबादी कम हो रही है और बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इन परिस्थितियों का असर चीन की भविष्य की अर्थव्यवस्था और श्रम बाजार पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
चीन की केंद्र सरकार ने भी देशभर में प्रसव के दौरान व्यक्तिगत खर्च को खत्म करने की दिशा में कदम उठाने का वादा किया था। हालांकि, यह व्यवस्था अभी तक पूरे देश में पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है। ऐसे में शंघाई की नई नीति को मातृत्व सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
चीन की घटती आबादी के पीछे उसकी दशकों पुरानी एक-बच्चा नीति को भी प्रमुख कारणों में गिना जाता है। आर्थिक और जनसांख्यिकीय दबाव को देखते हुए सरकार ने 2016 में इस नीति को खत्म कर दंपतियों को दो बच्चे पैदा करने की अनुमति दी थी। इसके बावजूद जन्म दर में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई तो 2021 में चीन ने दंपतियों को तीन बच्चे पैदा करने की अनुमति दे दी।
इसके बाद से केंद्र और स्थानीय सरकारें लोगों को परिवार बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कई योजनाएं लागू कर रही हैं। इनमें बच्चों की देखभाल के लिए आर्थिक सहायता, सब्सिडी और लंबी मातृत्व छुट्टी जैसे उपाय शामिल हैं।
चीन की चुनौती सिर्फ कम जन्म दर तक सीमित नहीं है। 2025 के अंत तक देश में 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों की संख्या करीब 32.34 करोड़ पहुंच गई थी, जो कुल आबादी का लगभग 23 प्रतिशत है। ऐसे में शंघाई का मुफ्त मातृत्व देखभाल का फैसला सरकार की उस व्यापक कोशिश का हिस्सा है, जिसके जरिए युवाओं को बच्चे पैदा करने के लिए आर्थिक रूप से अधिक अनुकूल माहौल देने की कोशिश की जा रही है।
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