3 दिनों में फूड पॉइजनिंग के कई मामले सामने आए, रेमबांग में अकेले 777 लोग चपेट में; अधपका खाना और खराब मांस की शिकायतों के बाद जांच शुरू
3 दिनों में फूड पॉइजनिंग के कई मामले सामने आए, रेमबांग में अकेले 777 लोग चपेट में; अधपका खाना और खराब मांस की शिकायतों के बाद जांच शुरू
इंडोनेशिया में सरकार के मुफ्त स्कूली भोजन कार्यक्रम को लेकर चिंता बढ़ गई है। पिछले तीन दिनों में इस योजना से जुड़े फूड पॉइजनिंग के कई संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिनमें करीब 2,000 छात्र और शिक्षक बीमार पड़ गए। ताजा मामला मध्य जावा के रेमबांग इलाके का है, जहां एक स्कूल में दूषित खाना खाने के बाद 777 लोगों की तबीयत बिगड़ गई।
रेमबांग के लासेम स्थित एक उच्च विद्यालय में बुधवार को मुफ्त भोजन कार्यक्रम ‘मकान बर्गीज़ी ग्रैटिस’ (MBG) के तहत खाना वितरित किया गया था। भोजन करने के बाद 752 छात्रों और 25 शिक्षकों में फूड पॉइजनिंग जैसे लक्षण दिखाई देने लगे। स्कूल की प्रधानाध्यापिका जुहारतुतिक के मुताबिक, कई लोगों को दस्त की शिकायत हुई और स्कूल के शौचालयों पर भी अचानक दबाव बढ़ गया।
स्थिति बिगड़ने के बाद स्कूल प्रशासन ने करीब 1,200 छात्रों और 95 कर्मचारियों को घर भेज दिया। वहीं, कई बीमार लोगों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। प्रधानाध्यापिका ने बताया कि सरकार इलाज का पूरा खर्च उठाएगी, जबकि स्थानीय खाद्य वितरक ने स्कूल पहुंचकर घटना की जिम्मेदारी लेने की बात कही है।
इससे पहले मंगलवार को पूर्वी जावा के सिदोरजो स्थित एक इस्लामिक बोर्डिंग स्कूल में भी MBG के तहत भोजन करने के बाद करीब 730 लोगों के बीमार पड़ने का मामला सामने आया था। प्रभावित लोगों में कई छात्रों को उल्टी, चक्कर और पेट संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा। कुछ लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जबकि कुछ छात्र इतने कमजोर हो गए कि उन्हें व्हीलचेयर की मदद से ले जाना पड़ा।
इसी सप्ताह दक्षिण सुलावेसी के ताना तोराजा समेत कई इलाकों में भी मुफ्त स्कूली भोजन से जुड़े फूड पॉइजनिंग के संदिग्ध मामलों की सूचना मिली है। इन घटनाओं ने सरकार की महत्वाकांक्षी मुफ्त भोजन योजना की खाद्य सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
माता-पिता और शिक्षकों ने खाने की गुणवत्ता को लेकर गंभीर शिकायतें की हैं। उनका कहना है कि परोसे गए चिकन का मांस चिपचिपा था, खाना अधपका लग रहा था और उसमें मछली जैसी गंध आ रही थी। हालांकि, इन शिकायतों के आधार पर फूड पॉइजनिंग की वास्तविक वजह अभी तय नहीं हुई है।
स्थानीय अधिकारियों ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। संभावित मिलावट और भोजन की गुणवत्ता की जांच के लिए खाने के नमूने परीक्षण के लिए भेजे गए हैं। शुरुआती तौर पर अनुचित भंडारण या भोजन को ठीक से न पकाया जाना संभावित कारणों में माना जा रहा है।
लासेम में भोजन वितरण इकाई के प्रमुख अहमद शोलेह शरीफुद्दीन ने घटना को लेकर माफी मांगी है और प्रभावित छात्रों व शिक्षकों के इलाज की पूरी जिम्मेदारी लेने की बात कही है। अब जांच के नतीजों से यह साफ होने की उम्मीद है कि आखिर मुफ्त भोजन योजना के तहत बांटे गए खाने में ऐसी क्या गड़बड़ी हुई, जिससे इतने बड़े पैमाने पर लोग बीमार पड़े।
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