असम के युवा खिलाड़ी ने स्वीडन के स्टॉकहोम में रचा इतिहास, यूट्यूब से सीखी रणनीतियां और हासिल किया अंतिम ग्रैंडमास्टर नॉर्म
असम के युवा खिलाड़ी ने स्वीडन के स्टॉकहोम में रचा इतिहास, यूट्यूब से सीखी रणनीतियां और हासिल किया अंतिम ग्रैंडमास्टर नॉर्म
ख़बर ख़ास, खेल :
शतरंज की दुनिया में भारत को एक और बड़ी उपलब्धि मिली है। असम के 16 वर्षीय प्रतिभाशाली खिलाड़ी मयंक चक्रवर्ती ने इतिहास रचते हुए भारत के 94वें शतरंज ग्रैंडमास्टर बनने का गौरव हासिल किया है। खास बात यह है कि मयंक नॉर्थ-ईस्ट भारत से इस मुकाम तक पहुंचने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार और राज्य के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में आयोजित ‘स्टॉकहोम नॉर्थ यंग टैलेंट टूर्नामेंट’ में मयंक ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपना अंतिम ग्रैंडमास्टर नॉर्म हासिल किया। टूर्नामेंट के आठवें राउंड में उन्होंने मजबूत प्रतिद्वंद्वी फिलिप लिंडबर्ग को हराकर यह ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली। इस जीत के साथ ही मयंक ने एक राउंड शेष रहते ही ग्रैंडमास्टर का दर्जा सुनिश्चित कर लिया।
टूर्नामेंट के दौरान मयंक ने कुल 9 राउंड में से 7 अंक हासिल किए और अपनी लाइव रेटिंग को 2508 तक पहुंचा दिया। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने कई अनुभवी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को पीछे छोड़ते हुए खिताब अपने नाम किया। उनकी रणनीतिक समझ, धैर्य और आक्रामक चालों ने सभी को प्रभावित किया।
मयंक की सफलता की कहानी संघर्ष और समर्पण से भरी है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने शतरंज की बारीकियों को समझने के लिए यूट्यूब और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का सहारा लिया। विभिन्न ग्रैंडमास्टर्स के मैच देखकर उन्होंने अपनी रणनीति और खेल शैली को लगातार निखारा। यही मेहनत आज उन्हें विश्व स्तर पर पहचान दिला रही है।
परिवार का समर्थन भी उनकी सफलता में महत्वपूर्ण रहा। बताया जाता है कि मयंक के पिता ने बेटे के सपने को साकार करने के लिए कई त्याग किए और हर कदम पर उनका साथ दिया। इसी समर्पण और मेहनत का परिणाम है कि आज मयंक भारतीय शतरंज इतिहास में अपना नाम दर्ज करा चुके हैं।
मयंक चक्रवर्ती की यह उपलब्धि नॉर्थ-ईस्ट के युवा खिलाड़ियों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है। उनकी सफलता यह साबित करती है कि प्रतिभा किसी क्षेत्र या संसाधन की मोहताज नहीं होती। सही दिशा, मेहनत और विश्वास के दम पर कोई भी खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना सकता है।
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