पुलिस के मुताबिक पेपर लीक नहीं हुआ; गिरोह पेन कैमरा, व्हाट्सऐप और ब्लूटूथ उपकरणों के जरिए रियल टाइम में जवाब पहुंचाता था, प्रति उम्मीदवार 13 लाख रुपये तक वसूले जाते थे
पुलिस के मुताबिक पेपर लीक नहीं हुआ; गिरोह पेन कैमरा, व्हाट्सऐप और ब्लूटूथ उपकरणों के जरिए रियल टाइम में जवाब पहुंचाता था, प्रति उम्मीदवार 13 लाख रुपये तक वसूले जाते थे
खबर खास | फरीदकोट
पंजाब पुलिस ने रविवार को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से 454 फार्मेसी ऑफिसर पदों के लिए आयोजित भर्ती परीक्षा के दौरान एक हाईटेक नकल गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में सात कथित मददगारों और 28 उम्मीदवारों को हिरासत में लिया गया है, जबकि अभियान के दौरान 27 बैटरी से चलने वाले वायरलेस उपकरण बरामद किए गए हैं।
जांच के अनुसार, यह नेटवर्क फरीदकोट, फिरोजपुर और कोटकपूरा के परीक्षा केंद्रों पर 42 उम्मीदवारों को ऑनलाइन नकल कराने में मदद कर रहा था। इनमें से 14 उम्मीदवार परीक्षा पूरी होने से पहले ही परीक्षा केंद्रों से बाहर निकल गए। पुलिस ने स्पष्ट किया कि प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ था और अब तक परीक्षा अधिकारियों या किसी सरकारी अधिकारी की भूमिका सामने नहीं आई है।
जांचकर्ताओं के मुताबिक परीक्षा शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद यह पूरा ऑपरेशन शुरू हुआ। आयुष नाम के एक उम्मीदवार ने कथित तौर पर पेन कैमरे की मदद से प्रश्नपत्र की तस्वीर खींची और उसे व्हाट्सऐप के जरिए हरियाणा के भिवानी निवासी साजन को भेजा। इसके बाद प्रश्नपत्र को राजस्थान के कोटपुतली-बहरोड़ निवासी दीपक तक पहुंचाया गया।
आरोप है कि दीपक ने मंजीत सिंह के साथ मिलकर फरीदकोट के सोसायटी नगर स्थित गुरमीत सिंह के घर में बनाए गए अस्थायी कंट्रोल रूम में प्रश्नपत्र हल किया। इसके बाद तैयार किए गए जवाब ब्लूटूथ से जुड़े वायरलेस उपकरणों के जरिए परीक्षा केंद्रों में बैठे उम्मीदवारों तक रियल टाइम में पहुंचाए गए।
खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस ने गुरमीत सिंह को हिरासत में लिया। पूछताछ में उसने कथित तौर पर स्वीकार किया कि नेटवर्क 42 उम्मीदवारों की नकल कराने में मदद कर रहा था। इसके बाद फरीदकोट, फिरोजपुर और कोटकपूरा के परीक्षा केंद्रों पर छापेमारी की गई, जहां से 28 उम्मीदवारों को हिरासत में लिया गया।
जांच में फाजिल्का स्थित संत कबीर पॉलिटेक्निक कॉलेज के कर्मचारी गुरमीत सिंह को इस पूरे ऑपरेशन का कथित मास्टरमाइंड बताया गया है।
पुलिस के अनुसार, नकल की पूरी प्रक्रिया परीक्षा शुरू होने के बाद अंजाम दी गई। इसलिए इसे पेपर लीक की श्रेणी में नहीं रखा जा रहा है। इस गिरोह ने प्रश्नपत्र की तस्वीर खींचकर उसे डिजिटल माध्यम से भेजा, बाहर से प्रश्न हल करवाए और फिर वायरलेस संचार उपकरणों के जरिए उम्मीदवारों तक जवाब पहुंचाए।
आरोप है कि गिरोह ने परीक्षा में सफलता दिलाने के लिए उम्मीदवारों से 3.5 लाख रुपये से लेकर 13 लाख रुपये तक वसूले। जांचकर्ताओं को यह भी पता चला है कि कई उम्मीदवारों ने भुगतान के तौर पर पोस्ट-डेटेड चेक दिए थे।
हिरासत में लिए गए आरोपियों में फरीदकोट का गुरमीत सिंह, झुंझुनू का मंजीत सिंह, कोटपुतली-बहरोड़ के दीपक और सुनील कुमार, गुरूहरसहाय का सतनाम सिंह, हरियाणा का बलवंत सिंह और भिवानी का एक अन्य आरोपी शामिल हैं।
पुलिस ने बताया कि 42 में से 28 उम्मीदवारों को हिरासत में लिया जा चुका है, जबकि बाकी 14 उम्मीदवारों की पहचान कर ली गई है और जांच के तहत उनसे पूछताछ की जाएगी। फरार आरोपियों, जिनमें भिवानी का साजन भी शामिल है, को पकड़ने के लिए प्रयास जारी हैं।
फरीदकोट रेंज की इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस नीलांबरी जगदाले ने बताया कि विश्वविद्यालय ने 28 हिरासत में लिए गए उम्मीदवारों की सूची उपलब्ध कराई है और उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। लिखित शिकायत मिलने के बाद भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत औपचारिक मामला दर्ज किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच में बाहरी ऑपरेटरों की संलिप्तता के संकेत मिले हैं और जांच आगे बढ़ने के साथ और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।
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