विनायक सैनी ने कहा- परीक्षा केंद्रों और कमरों के परिणामों में अंतर सामान्य सांख्यिकीय पैटर्न के भीतर; 751 उम्मीदवार इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट
विनायक सैनी ने कहा- परीक्षा केंद्रों और कमरों के परिणामों में अंतर सामान्य सांख्यिकीय पैटर्न के भीतर; 751 उम्मीदवार इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट
खबर खास | चंडीगढ़
पंजाब लोक सेवा आयोग (पीपीएससी) के अध्यक्ष विनायक सैनी ने पंजाब पीसीएस मेन्स परीक्षा परिणामों में धांधली और अनियमितताओं के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभिन्न परीक्षा केंद्रों और परीक्षा कक्षों (क्लास रूम) के पासिंग प्रतिशत में आंशिक अंतर केवल सामान्य सांख्यिकीय उतार-चढ़ाव का हिस्सा है और पूरी परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी रही है।
आयोग ने अपना स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि कुछ विशेष परीक्षा केंद्रों से अधिक उम्मीदवारों के पास होने के आरोप आंकड़ों की गलत व्याख्या पर आधारित हैं। पीसीएस मेन्स परीक्षा पटियाला के 12 केंद्रों पर आयोजित की गई थी, जहां प्रत्येक केंद्र पर परीक्षार्थियों की संख्या 118 से 553 के बीच थी। परीक्षा में कुल 3,959 उम्मीदवार शामिल हुए थे, जिनमें से 751 उम्मीदवारों को साक्षात्कार (इंटरव्यू) के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है। अनुपस्थित अभ्यर्थियों को घटाने के बाद कुल सफलता दर लगभग 19 प्रतिशत रही है।
एक ही केंद्र से 24% उम्मीदवारों के चयन का दावा गलत
मीडिया में चल रहे उन दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कि 24 फीसदी सफल उम्मीदवार केवल एक ही परीक्षा केंद्र से हैं, पीपीएससी ने आंकड़े सामने रखे। आयोग ने बताया कि किसी एक केंद्र से शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों की अधिकतम संख्या 106 है, जो कुल सफल अभ्यर्थियों का मात्र 14.1 प्रतिशत है। यह केंद्र परीक्षार्थियों की संख्या के हिसाब से दूसरा सबसे बड़ा केंद्र था, जहां 496 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी।
कमरों के हिसाब से नतीजों पर आयोग ने बताया कि 179 परीक्षा कक्षों से कुल 751 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए चुना गया है, यानी प्रति कमरा औसतन 4.2 अभ्यर्थी सफल हुए हैं। तीन अलग-अलग केंद्रों के कुछ कमरों से 10 या 11 अभ्यर्थियों के पास होने की खबरें पूरी तरह से सांख्यिकीय संभावनाओं के दायरे में हैं। आयोग ने 2020 की मेन्स परीक्षा का उदाहरण देते हुए बताया कि उस समय भी दो केंद्रों पर केवल 960 छात्र होने के बावजूद कुछ कमरों से 9-9 अभ्यर्थी सफल हुए थे।
लगातार रोल नंबर पास होने पर भी दी सफाई
लगातार (कंसेक्यूटिव) रोल नंबरों के शॉर्टलिस्ट होने के सवाल पर आयोग ने कहा कि यह पैटर्न पहले की परीक्षाओं में भी देखा गया है। साल 2018 में 153 सफल छात्रों में लगातार रोल नंबरों के 26 समूह थे, जबकि 2020 में 177 सफल छात्रों में ऐसे 28 समूह थे। इस बार 2025 की परीक्षा में 751 शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों में ऐसे 118 समूह पाए गए हैं।
आयोग ने यह भी साफ किया कि किसी भी अनुपस्थित अभ्यर्थी को पास घोषित नहीं किया गया है। सभी परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक और मैनुअल दोनों तरीकों से उपस्थिति दर्ज की गई थी।
पटियाला में ही केंद्र क्यों बनाए गए?
परीक्षा केंद्रों के चयन पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए पीपीएससी ने कहा कि प्रशासनिक, लॉजिस्टिक और सुरक्षा कारणों से पटियाला और उसके आसपास केंद्र बनाए गए थे ताकि प्रभावी निगरानी रखी जा सके। आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा मेन्स परीक्षाओं में यह हमेशा से स्थापित प्रक्रिया रही है। वहीं, परीक्षा केंद्र के राजनीतिक निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े सवालों पर आयोग ने कहा कि किसी हलके में सत्तारूढ़ दल का प्रतिनिधि होना परीक्षा के संचालन या नतीजों को किसी भी तरह प्रभावित नहीं करता।
पीपीएससी ने अंत में दोहराया कि नियमों और विज्ञापन के अनुसार प्रत्येक श्रेणी में योग्य रिक्तियों के तीन गुना उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया है। परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के लिए मुख्य द्वार और कंट्रोल रूम में सीसीटीवी कैमरे, बायोमेट्रिक हाजिरी और हर कमरे में मोबाइल नेटवर्क जैमर जैसी सख्त सुरक्षा व्यवस्था मौजूद थी।
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