सातवें पंजाब वित्त आयोग के नवनियुक्त सदस्यों के साथ बैठक में मुख्यमंत्री ने पारदर्शी वित्तीय विकेंद्रीकरण और स्थानीय निकायों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने पर दिया जोर
सातवें पंजाब वित्त आयोग के नवनियुक्त सदस्यों के साथ बैठक में मुख्यमंत्री ने पारदर्शी वित्तीय विकेंद्रीकरण और स्थानीय निकायों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने पर दिया जोर
खबर खास | चंडीगढ़
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने मंगलवार को राज्य में ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों के लिए मजबूत वित्तीय ढांचे की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर शासन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए वित्तीय संसाधनों का पारदर्शी और न्यायसंगत विकेंद्रीकरण जरूरी है, ताकि पंचायतों और नगर निकायों को अपनी जिम्मेदारियां प्रभावी ढंग से निभाने के लिए पर्याप्त संसाधन मिल सकें।
मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त सातवें पंजाब वित्त आयोग के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि आयोग का गठन राज्य सरकार और पंचायतों तथा नगर निकायों के बीच करों, शुल्क, सड़क कर और अन्य राजस्व के बंटवारे की सिफारिश करने के लिए किया गया है। आयोग स्थानीय निकायों की आर्थिक स्थिति और वित्तीय स्थिरता में सुधार के उपाय भी सुझाएगा।
मुख्यमंत्री ने वित्त आयोग को वित्तीय विकेंद्रीकरण की एक महत्वपूर्ण संवैधानिक व्यवस्था बताते हुए कहा कि 73वें संविधान संशोधन के तहत पंचायत राज संस्थाओं और नगर निकायों को अपनी जिम्मेदारियां प्रभावी ढंग से निभाने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति का आकलन करना और वित्तीय अधिकारों के हस्तांतरण को मजबूत करने के लिए प्रभावी ढांचा सुझाना आयोग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं। नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने और स्थानीय स्तर पर बुनियादी ढांचे के विकास में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में संसाधनों के बंटवारे की व्यवस्था पारदर्शी, न्यायसंगत और लंबे समय तक टिकाऊ होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि आयोग स्थानीय निकायों की आय की संभावनाओं, खर्च की जिम्मेदारियों और वित्तीय जरूरतों का व्यापक आकलन करेगा। इसके आधार पर आयोग स्थानीय निकायों की आर्थिक क्षमता बढ़ाने के लिए व्यावहारिक और भविष्य को ध्यान में रखते हुए सिफारिशें देगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आयोग को राज्य सरकार द्वारा लगाए जाने वाले करों, शुल्क, चुंगी और फीस से प्राप्त शुद्ध राजस्व के बंटवारे की सिफारिश करनी है। इसमें राज्य सरकार और स्थानीय निकायों के बीच संसाधनों के वितरण के साथ-साथ विभिन्न स्तरों की पंचायतों और नगर निकायों के बीच इन संसाधनों के आवंटन का सुझाव भी शामिल होगा।
उन्होंने कहा कि आयोग स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति सुधारने, गैर-उत्पादक खर्च कम करने, प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और पूंजीगत संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल के लिए तकनीकी सहायता मजबूत करने के उपाय भी सुझाएगा।
सातवें पंजाब वित्त आयोग का गठन पंचायतों और नगर पालिकाओं के लिए पंजाब वित्त आयोग अधिनियम, 1994 की धारा 3 की उपधारा 1 के तहत किया गया है। पंजाब के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव के. शिव प्रसाद को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। शोइकत रॉय विशेषज्ञ सदस्य होंगे। ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग तथा स्थानीय निकाय विभाग के प्रशासनिक सचिव पदेन सदस्य होंगे, जबकि वित्त विभाग के विशेष सचिव पदेन सदस्य सचिव की जिम्मेदारी संभालेंगे।
मुख्यमंत्री ने आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष और सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए आयोग को उसके दायित्वों को पूरा करने में राज्य सरकार की ओर से पूरा सहयोग देने का भरोसा दिया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि आयोग अपनी रिपोर्ट 30 सितंबर 2027 तक प्रस्तुत करेगा। यह रिपोर्ट 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली पांच वर्ष की अवधि को कवर करेगी। उन्होंने कहा कि आयोग अपनी सिफारिशों और निष्कर्षों का आधार भी स्पष्ट रूप से बताएगा, ताकि व्यापक जनहित में वित्तीय व्यवस्था को मजबूत किया जा सके।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक शेखर, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव, स्थानीय निकाय विभाग के सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
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