चुनाव आयोग (ईसीआई) ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट को बताया कि ईवीएम राजस्थान से पहले ही पंजाब के लिए रवाना की जा चुकी हैं और 27 मई के नगर निकाय चुनावों से पहले सभी तकनीकी प्रक्रियाएं एक दिन के भीतर पूरी की जा सकती हैं।
चुनाव आयोग (ईसीआई) ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट को बताया कि ईवीएम राजस्थान से पहले ही पंजाब के लिए रवाना की जा चुकी हैं और 27 मई के नगर निकाय चुनावों से पहले सभी तकनीकी प्रक्रियाएं एक दिन के भीतर पूरी की जा सकती हैं।
खबर खास | चंडीगढ़
पंजाब के नगर निकाय चुनावों से महज पांच दिन पहले ईवीएम और बैलेट पेपर से मतदान कराने को लेकर विवाद और तेज हो गया है। गुरुवार को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग (ईसीआई) ने कहा कि आवश्यक ईवीएम पहले ही राजस्थान से पंजाब भेज दी गई हैं और सभी तकनीकी तैयारियां एक दिन में पूरी की जा सकती हैं।
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष हुई। चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि 20 मई को पंजाब राज्य चुनाव आयोग को भेजे गए पत्र के बाद मशीनों की उपलब्धता से जुड़ी सभी चिंताएं दूर कर ली गई हैं।
आयोग ने अदालत को बताया कि राजस्थान ने मशीनें सीधे पंजाब भेजी हैं, क्योंकि राज्य ने उन्हें स्वयं लेने से कथित तौर पर इनकार कर दिया था। सुनवाई के दौरान आयोग के वकील ने कहा, “मशीनें रास्ते में हैं और फिलहाल ट्रांजिट में हैं।”
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि मशीनों को मोहाली तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की जा रही है। केवल अंतिम डिलीवरी पॉइंट और अधिकृत रिसीविंग अधिकारी का निर्धारण अभी बाकी है।
ईसीआई का दावा: तकनीकी प्रक्रिया एक दिन में पूरी हो सकती है
चुनाव आयोग ने तर्क दिया कि ईवीएम की कमीशनिंग और अन्य तकनीकी प्रक्रियाएं सिर्फ एक दिन में पूरी की जा सकती हैं। आयोग ने पहले चरण की जांच (एफएलसी) और मशीनों की तैयारी में पूर्ण सहयोग का भरोसा भी दिया।
यह दावा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पंजाब राज्य चुनाव आयोग ने पहले अदालत को बताया था कि यदि ईवीएम उपलब्ध भी हो जाती हैं, तो उनकी जांच, तैयारी और तैनाती में 15 से 18 दिन लगेंगे। इसी आधार पर राज्य आयोग ने 27 मई के चुनाव बैलेट पेपर से कराने का निर्णय लिया था।
बैलेट पेपर फैसले को चुनौती
यह मामला उस याचिका से जुड़ा है जिसमें नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत चुनाव ईवीएम की बजाय बैलेट पेपर से कराने के फैसले को चुनौती दी गई है।
एक दिन पहले चुनाव आयोग ने अदालत में विस्तृत टाइमलाइन पेश करते हुए दावा किया था कि देरी राज्य चुनाव आयोग की ओर से हुई है, केंद्रीय चुनाव आयोग की ओर से नहीं। इसके बाद हाईकोर्ट ने पंजाब राज्य चुनाव आयोग को अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार के मुख्य वकील मनिंदरजीत सिंह बेदी ने याचिका की वैधता पर सवाल उठाया और कहा कि चुनाव अधिसूचना जारी होने के बाद न्यायिक हस्तक्षेप सीमित हो जाता है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए अदालत से याचिका के दायरे की सावधानीपूर्वक जांच करने का आग्रह किया।
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