तीसरे दिन सदन में बेअदबी विधेयक, रोजगार और मंत्रियों की टिप्पणियों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने
तीसरे दिन सदन में बेअदबी विधेयक, रोजगार और मंत्रियों की टिप्पणियों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने
खबर खास | चंडीगढ़
पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार द्वारा प्रस्तावित नए बेअदबी कानून को लेकर सदन में जमकर हंगामा हुआ। प्रस्तावित विधेयक पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और राजनीतिक टकराव देखने को मिला।
शिरोमणि अकाली दल की मजीठा से विधायक गनीव कौर मजीठिया ने शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल किया कि श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा व्यक्त किए गए विचारों के अनुरूप प्रस्तावित कानून में संशोधन क्यों नहीं किया जा रहा है।
मजीठिया ने उन कथित टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई, जिनमें संगत (श्रद्धालुओं) को गुरु से ऊपर बताए जाने का संकेत दिया गया था। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार "गुरु को चुनौती" देना चाहती है।
उनकी टिप्पणियों के बाद विधानसभा अध्यक्ष, एक कैबिनेट मंत्री और एक अन्य विधायक ने हस्तक्षेप किया। अध्यक्ष ने कड़ा जवाब देते हुए कहा कि मजीठिया के परिवार के सदस्यों ने भी अतीत में अकाल तख्त की सर्वोच्चता को चुनौती दी थी। उन्होंने ऐसे व्यक्ति का उल्लेख किया जिसे 'फख्र-ए-कौम' सम्मान मिला था, लेकिन जत्थेदार के बुलावे के बावजूद वह अकाल तख्त के समक्ष पेश नहीं हुआ।
अध्यक्ष ने मजीठिया की पंथिक परंपराओं की समझ पर भी सवाल उठाए, जिससे सदन का माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।
इसके बाद सदन में रोजगार का मुद्दा उठा, जिस पर कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह और AAP मंत्री अमन अरोड़ा के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने आरोप लगाया कि सरकार बड़े पैमाने पर नौकरियां देने के दावे वाले बोर्ड लगाती रही है। उन्होंने सरकार से रोजगार पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग करते हुए पूछा कि—
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इस मांग को खारिज करते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया ही पारदर्शिता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि लाभार्थियों से वीडियो कॉल के माध्यम से भी बात की जा सकती है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस सरकारों के दौरान राजनीतिक प्रभाव के आधार पर सरकारी नौकरियां दी जाती थीं।
चीमा ने कांग्रेस शासनकाल के दौरान प्रभावशाली नेताओं के रिश्तेदारों को सरकारी नौकरियां मिलने के कथित उदाहरण भी पेश किए।
शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस, जिन्हें एक दिन पहले की गई टिप्पणियों को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ा था, ने विधानसभा में सफाई दी।
उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी भी किसी को "पुत्त" या "बेटा" गलत मंशा से नहीं कहा। उन्होंने बताया कि शिक्षा मंत्री होने के नाते विद्यार्थियों से स्नेहपूर्वक इस प्रकार संबोधित करना उनकी आदत है। बैंस ने यह भी कहा कि साधारण पृष्ठभूमि से आने का मतलब यह नहीं कि कोई अपनी बात खुलकर न रख सके।
कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह ने दावा किया कि वर्ष 2002 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता आई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उससे पहले नौकरियां "बेची" जाती थीं।
उन्होंने AAP सरकार पर नए रोजगार अवसर पैदा करने के लिए ठोस योजना न होने का आरोप लगाया। साथ ही सुझाव दिया कि निजी बाउंसरों और सुरक्षा कर्मियों को औपचारिक मान्यता, प्रशिक्षण और नियमन दिया जाए, जिससे रोजगार बढ़ाने के साथ-साथ अपराध पर भी नियंत्रण पाया जा सके।
इसके जवाब में उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री अमन अरोड़ा ने कांग्रेस के वर्ष 2017 विधानसभा चुनाव के नारे— "कैप्टन ने सौगंध चक्की, हर घर नौकरी पक्की" —की याद दिलाते हुए कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार अपने इस वादे को पूरा करने में विफल रही।
AAP विधायक मनुके ने भी बहस में हिस्सा लेते हुए दावा किया कि राणा गुरजीत सिंह के गांव की एक महिला को सरकारी नौकरी मिली है। उन्होंने सदन में ही वीडियो कॉल के जरिए इसकी पुष्टि कराने की पेशकश भी की।
बेअदबी विधेयक, रोजगार, मंत्रियों की टिप्पणियों और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को लेकर पूरे दिन सदन में लगातार हंगामा होता रहा। बार-बार व्यवधान और तीखी बहस के बीच विधानसभा की कार्यवाही अंततः गुरुवार सुबह 10 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
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