इस पहल का उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा संशोधित नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना था।
इस पहल का उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा संशोधित नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना था।
खबर खास, चंडीगढ़ :
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) ने रीना गुप्ता की अध्यक्षता में महात्मा गांधी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, चंडीगढ़ में नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) नियम, 2026 पर एक व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया।
इस पहल का उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा संशोधित नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना था।
नए अधिसूचित एसडब्ल्यूएम नियम, 2026 के तहत 2016 के ढांचे में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं और ये 1 अप्रैल, 2026 से लागू होंगे। संशोधित नियमों के अंतर्गत वैज्ञानिक तरीके से अपशिष्ट प्रबंधन, स्रोत स्तर पर कचरे का पृथक्करण तथा हितधारकों की जवाबदेही बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में 268 अधिकारी शामिल हुए, जिनमें शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) के कार्यकारी अधिकारी, एसडब्ल्यूएम नोडल अधिकारी, कार्यक्रम समन्वयक, क्षमता निर्माण विशेषज्ञ तथा पीपीसीबी के अधिकारी शामिल थे। सत्र के दौरान भूमिकाओं, जिम्मेदारियों और नए नियामक प्रावधानों के अंतर्गत आवश्यक क्रियान्वयन ढांचे की जानकारी दी गई।
थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (टीआईईटी) के ऊर्जा एवं पर्यावरण विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. धमोधरन के. ने दो घंटे के सत्र का संचालन किया, जिसमें उन्होंने प्रमुख प्रावधानों, 2016 के नियमों में संरचनात्मक बदलावों तथा क्रियान्वयन से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों पर चर्चा की। इसके अतिरिक्त, पीपीसीबी के सहायक पर्यावरण अभियंता श्री अक्षित कपिल ने एक सत्र के दौरान संशोधित नियमों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया, जिसमें क्षेत्रीय स्तर पर क्रियान्वयन से संबंधित प्रमुख बदलावों और उनके प्रभावों को उजागर किया गया।
यह कार्यक्रम विभागों की क्षमता बढ़ाने तथा क्रियान्वयन की तिथि से पहले सभी तैयारियों को सुनिश्चित करने केy व्यापक प्रयास का हिस्सा है। विभिन्न स्तरों के अधिकारियों को एक साथ लाकर, पीपीसीबी का उद्देश्य नियामक ढांचे के बारे में व्यापक समझ विकसित करना और पूरे राज्य में इसके सुचारु क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना है।
इस कार्यशाला के अंत में एक संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के साथ कार्यान्वयन से संबंधित चुनौतियों पर चर्चा की और अपने जमीनी अनुभव साझा किए। इस कार्यशाला ने पंजाब में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रथाओं में सुधार के प्रति प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ किया।
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