सत्र में पंजाब की उत्तर भारत का स्टील हब बनने की क्षमता पर जोर
सत्र में पंजाब की उत्तर भारत का स्टील हब बनने की क्षमता पर जोर
खबर खास, चंडीगढ़/एसएएस नगर :
प्रोग्रेसिव पंजाब इन्वेस्टर समिट (पीपीआईएस) – 2026 के दूसरे दिन प्लाक्शा विश्वविद्यालय में आयोजित स्टील और रोलिंग मिल्स सत्र में चर्चा का मुख्य केंद्र यह रहा कि पंजाब की अपार संभावनाओं का उपयोग कैसे किया जाए ताकि इसे उत्तर भारत का स्पेशलिटी स्टील हब बनाया जा सके।
जल संसाधन, खनन और भूविज्ञान मंत्री ने पंजाब में उद्योग और व्यवसाय मित्रवत पारिस्थितिकी तंत्र पर ध्यान केंद्रित किया। मंत्री ने कहा, "आप जो आवश्यकता बताएंगे, हम उसे पूरा करेंगे", और यह भी जोड़ा कि पिछले चार वर्षों में राज्य में 1.55 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया है। इसके अलावा, राज्य कई देशों को साइकिल, फार्मास्यूटिकल्स, बिस्कुट, बासमती चावल और अन्य उत्पादों का निर्यात करता है। ऊन के बने वस्त्र, साइकिल, हैंड टूल्स और ट्रैक्टर निर्माण जैसी सभी चीज़ें पंजाब में उपलब्ध हैं, जो इसे निवेश के लिए सर्वोत्तम गंतव्य बनाती हैं।
अपने प्रस्तुती में पंजाब की प्रमुख सचिव (रोजगार सृजन) अलकानंदा दयाल ने नए औद्योगिक नीति में उद्योगों को मिलने वाले विभिन्न प्रोत्साहनों को उजागर किया, जैसे कि: 500 करोड़ रुपये निवेश करने वाली मेगा यूनिट कस्टमाइज्ड पैकेज के लिए पात्र, ग्रीन कैटेगरी उद्योगों को नियमित निरीक्षण से छूट, बिजली शुल्क में छूट के लिए स्वीकृति सात दिनों में, सिंगल एंट्री – सिंगल एग्जिट डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म, जिसमें मंजूरी 45 दिनों में दी जाती है।
सचिव, निवेश प्रमोशन , उद्योग एवं वाणिज्य, गुरकीरत कृपाल सिंह ने औद्योगिक इकाइयों द्वारा पर्यावरण-अनुकूल और हरित ऊर्जा को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया, क्योंकि यह वैश्विक प्रवृत्ति है।
टाटा स्टील्स के चीफ कॉर्पोरेट अफेयर्स, मनीष मिश्रा ने पर्यावरण-अनुकूल लो-कार्बन स्टील उत्पादन के लिए कुशल स्क्रैप इकोसिस्टम बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
टीके स्टील्स के सीईओ, लोकेश जैन, ने पंजाब सरकार के बिजनेस इकोसिस्टम की सराहना करते हुए उद्योग के छोटे उदमियों के लिए तकनीकी उन्नयन पर जोर दिया।
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