2023 के मुकाबले 2024 में शिशु मृत्यु दर में 17.56% की बढ़ोतरी, अमृतसर में सबसे अधिक 835 मौतें; कुल मामलों में लगभग 90% शहरी क्षेत्रों से
2023 के मुकाबले 2024 में शिशु मृत्यु दर में 17.56% की बढ़ोतरी, अमृतसर में सबसे अधिक 835 मौतें; कुल मामलों में लगभग 90% शहरी क्षेत्रों से
खबर खास | चंडीगढ़
पंजाब में वर्ष 2024 के दौरान शिशु मृत्यु के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) पर आधारित वाइटल स्टैटिस्टिक्स रिपोर्ट 2024 के अनुसार, राज्य में वर्ष 2024 में 2,671 शिशुओं की मौत दर्ज की गई, जबकि वर्ष 2023 में यह संख्या 2,272 थी। यानी एक वर्ष में 17.56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में होने वाली कुल शिशु मौतों में लगभग 90 प्रतिशत मामले शहरी क्षेत्रों से सामने आए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में पंजाब में शिशु मृत्यु के मामलों में लगातार उतार-चढ़ाव के बाद अब फिर तेजी से वृद्धि देखी गई है। वर्ष 2020 में 1,884, 2021 में 1,830, 2022 में 2,336, 2023 में 2,272 और 2024 में 2,671 शिशुओं की मौत दर्ज की गई।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि समय से पहले जन्म (प्रीमैच्योर डिलीवरी), प्रसव के दौरान ऑक्सीजन की कमी (बर्थ एस्फिक्सिया), संक्रमण और गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त देखभाल का अभाव शिशु मृत्यु के प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा खराब स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता की कमी, कुपोषण और डायरिया जैसी बीमारियां भी इस समस्या को बढ़ा रही हैं।
वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति में सुधार देखने को मिला है। पूरे भारत में वर्ष 2024 के दौरान शिशु मृत्यु के मामलों में 17.12 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। देशभर में 2023 के 1.45 लाख मामलों की तुलना में 2024 में यह संख्या घटकर 1.20 लाख रह गई।
जिलावार आंकड़ों में अमृतसर सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां 835 शिशु मौतें दर्ज की गईं। इसके बाद जालंधर (368), लुधियाना (348) और पटियाला (331) का स्थान रहा।
रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग ने इन जिलों को प्राथमिकता वाले क्षेत्र घोषित किया है। शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए अस्पतालों के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है, डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के खाली पद भरे जा रहे हैं तथा लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं।
जिलावार शिशु मृत्यु (2024):
- अमृतसर – 835
- जालंधर – 368
- लुधियाना – 348
- पटियाला – 331
- बठिंडा – 187
- फरीदकोट – 169
- मोहाली – 87
- होशियारपुर – 60
- मोगा – 55
- पठानकोट – 36
- फाजिल्का – 32
- गुरदासपुर – 32
- शहीद भगत सिंह नगर – 25
- बरनाला – 18
- संगरूर – 16
- श्री मुक्तसर साहिब – 15
- कपूरथला – 12
- मलेरकोटला – 12
- तरनतारन – 11
- फिरोजपुर – 8
- फतेहगढ़ साहिब – 5
- मानसा – 5
- रूपनगर – 4 (राज्य में सबसे कम)
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