84,000 वॉयस सैंपल और 3.9 लाख अपराधियों के डेटा से लैस सिस्टम, विदेशों में बैठे गैंगस्टरों तक पहुंच रही पुलिस
84,000 वॉयस सैंपल और 3.9 लाख अपराधियों के डेटा से लैस सिस्टम, विदेशों में बैठे गैंगस्टरों तक पहुंच रही पुलिस
खबर खास | चंडीगढ़
पंजाब पुलिस ने अपने “गैंगस्टरों पर युद्ध” अभियान को और मजबूत करते हुए पंजाब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम (भूक्षेत्र) के तहत एक अत्याधुनिक AI-आधारित तकनीक को लागू किया है। इस नई प्रणाली से पुलिस की संगठित अपराध नेटवर्क को ट्रैक करने और खत्म करने की क्षमता में बड़ा इजाफा हुआ है।
इस पहल के केंद्र में एक एडवांस वॉयस रिकग्निशन सिस्टम है, जिसमें अपराधियों और संदिग्धों के 84,000 से अधिक वॉयस सैंपल का “वॉयस बैंक” तैयार किया गया है। यह AI तकनीक जबरन वसूली, धमकियों और अन्य अपराधों में शामिल लोगों की पहचान करने में बेहद कारगर साबित हो रही है, खासकर उन मामलों में जो विदेशों से संचालित किए जा रहे हैं।
भूक्षेत्र प्लेटफॉर्म केवल आवाज पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें 3.9 लाख से अधिक अपराधियों का विशाल डेटाबेस भी शामिल है। इसमें फोनैटिक सर्च और “गैंग ट्री सर्च” जैसे उन्नत फीचर्स हैं, जो स्थानीय अपराधियों से लेकर अंतरराष्ट्रीय सरगनाओं तक पूरे नेटवर्क का विजुअल मैप तैयार करते हैं।
अधिकारियों के अनुसार, पंजाब से जुड़े करीब 60 हाई-रिस्क गैंगस्टर इस समय कनाडा, अमेरिका और इटली जैसे देशों से ऑपरेट कर रहे हैं। कानून प्रवर्तन एजेंसियां “रिमोट कंट्रोल” एक्सटॉर्शन के बढ़ते मामलों से जूझ रही थीं, जहां एन्क्रिप्टेड ऐप्स और अंतरराष्ट्रीय वर्चुअल नंबरों के जरिए धमकियां दी जाती हैं।
एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) के ADGP प्रमोद बान ने बताया कि AI आधारित इस सिस्टम ने प्रतिक्रिया समय और सटीकता में जबरदस्त सुधार किया है। उन्होंने कहा, “पहले विदेशी गैंगस्टर तकनीक का फायदा उठाकर सुरक्षित ठिकानों से उगाही करते थे, लेकिन अब AI वॉयस मैचिंग से हम मिनटों में कॉलर की पहचान कर सकते हैं, जिससे तुरंत कार्रवाई संभव हो पाती है।”
अधिकारियों ने यह भी बताया कि यह सिस्टम “प्रेडिक्टिव पुलिसिंग” को बढ़ावा दे रहा है, जिससे अपराध होने से पहले ही उन्हें रोका जा सकता है। हाल के ऑपरेशनों में विदेशों में बैठे हैंडलर्स और स्थानीय अपराधियों के बीच डिजिटल कम्युनिकेशन को ट्रैक कर कई टारगेटेड हत्याओं को नाकाम किया गया।
प्रमोद बान ने आगे कहा, “पहले हम अलग-अलग घटनाओं को संभालते थे, लेकिन अब PAIS की मदद से पूरे नेटवर्क को ट्रेस कर सकते हैं कि कौन फंडिंग कर रहा है, कौन सहयोग दे रहा है और कौन अपराध को अंजाम दे रहा है। यह इंटेलिजेंस आधारित रणनीति हमें केवल अपराधियों को पकड़ने ही नहीं, बल्कि पूरे सिंडिकेट को खत्म करने में मदद करती है।”
इस तकनीक ने एजीटीएफ के प्रयासों को और मजबूती दी है, वहीं एक विशेष फ्यूजिटिव ट्रैकिंग सेल भी भूक्षेत्र का उपयोग कर इंटरपोल जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर रही है। इससे विदेशों में छिपे अपराधियों की पहचान और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तेज हो रही है।
अधिकारियों का कहना है कि यह पारंपरिक पुलिसिंग से प्रेडिक्टिव पुलिसिंग की ओर एक बड़ा बदलाव है। अब पुलिस पहले से खतरे की पहचान कर सकती है, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख सकती है और समय रहते कार्रवाई कर सकती है। साफ संदेश है—अपराधी कहीं भी हों, उन्हें ढूंढकर कानून के कटघरे में लाया जाएगा।
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