चंडीगढ़ रेजिडेंट्स वेलफेयर फेडरेशन ने हाउसिंग बोर्ड से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने और 1999 के दिल्ली मॉडल के आधार पर नीति बनाने की अपील की
चंडीगढ़ रेजिडेंट्स वेलफेयर फेडरेशन ने हाउसिंग बोर्ड से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने और 1999 के दिल्ली मॉडल के आधार पर नीति बनाने की अपील की
खबर खास | चंडीगढ़
चंडीगढ़ रेजिडेंट्स वेलफेयर फेडरेशन (CRAWFED) ने चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (CHB) से आग्रह किया है कि वह परिवारों की जरूरतों के अनुसार आवासीय इकाइयों में किए गए बदलावों के लिए एक व्यापक और पारदर्शी एकमुश्त नियमितीकरण (one-time regularisation) नीति पेश करे।
फेडरेशन का अनुमान है कि CHB के लगभग 62,000 से 68,000 आवासीय मकानों में से करीब 80 से 90 प्रतिशत में जरूरत के हिसाब से किसी न किसी तरह का बदलाव किया गया है, जिससे लगभग पांच लाख निवासी प्रभावित हो रहे हैं।
क्रॉफेड के महासचिव डॉ. अनीश गर्ग ने कहा कि इनमें से अधिकांश बदलाव सालों के दौरान बढ़ते परिवारों, बुजुर्ग सदस्यों की जरूरतों, गोपनीयता, स्टोरेज (भंडारण) की आवश्यकताओं और बेहतर रोशनी व हवा की जरूरत को ध्यान में रखकर किए गए थे। इनमें कमरे और शौचालय जोड़ना, बालकनी का उपयोग करना, आंगन को ढंकना और अन्य आंतरिक बदलाव शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि अलग-अलग समय पर नियमों और नीतियों में हुए लगातार बदलावों के कारण वे निवासी भी कानूनी अनिश्चितता में फंस गए हैं, जिन्होंने उस समय लागू नियमों के अनुसार बदलाव किए थे। उन्होंने इस मुद्दे को हल करने के लिए एकमुश्त समाधान की आवश्यकता पर बल दिया।
दिल्ली के 1999 मॉडल पर नीति का सुझाव
क्रॉफेड ने सुझाव दिया है कि चंडीगढ़ को दिल्ली की 1999 की नीति की तर्ज पर एकमुश्त नियमितीकरण नीति अपनानी चाहिए।
फेडरेशन के अनुसार, आवंटित प्लॉट या भवन की निर्धारित सीमाओं के भीतर किए गए ऐसे बदलाव (जो अतिक्रमण की श्रेणी में नहीं आते) को एक उचित शुल्क के भुगतान और संरचनात्मक सुरक्षा प्रमाणपत्र (structural safety certificate) जमा करने पर नियमित किया जा सकता है।
डॉ. गर्ग ने कहा कि सरकारी या साझा भूमि पर अतिक्रमण की अनुमति बिल्कुल नहीं दी जानी चाहिए। हालांकि, साधारण पारिवारिक जरूरतों को पूरा करने के लिए मकानों की निर्धारित सीमाओं के भीतर किए गए बदलावों के प्रति एक व्यावहारिक और मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
पुराने उल्लंघनों के कारण संपत्ति हस्तांतरण न रोका जाए
फेडरेशन ने यह मांग भी की है कि मकानों से जुड़े पुराने उल्लंघनों को संपत्तियों के हस्तांतरण (transfer) और नामंतरण (mutation) से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। इससे निवासियों को अपनी संपत्तियों को बेचने, उपहार में देने या विरासत के माध्यम से ट्रांसफर करने के लिए अनिश्चित काल तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
अनुवाद शैली: यह पाठ समाचार पत्र (Journalistic/Print Media) की आधिकारिक और औपचारिक हिंदी शैली में तैयार किया गया है।
तकनीकी शब्दावली: 'Mutation' को हिंदी प्रशासनिक संदर्भ में 'नामंतरण/दाखिल-खारिज' और 'Regularisation' को 'नियमितीकरण' कहा गया है।
संरचनात्मक स्थिरता: मूल समाचार के सभी पैराग्राफ, मुख्य शीर्षक, उप-शीर्षक (Sub-heading) और विषय सामग्री को बिना किसी बदलाव के यथावत रखा गया है।
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