आप पंजाब के मीडिया प्रभारी ने बहरीन की महिला के मामले में कथित वित्तीय लेन-देन, आठ महीने के ठहराव और जांच को लेकर एसजीपीसी व अकाली दल नेतृत्व से सवाल किए
आप पंजाब के मीडिया प्रभारी ने बहरीन की महिला के मामले में कथित वित्तीय लेन-देन, आठ महीने के ठहराव और जांच को लेकर एसजीपीसी व अकाली दल नेतृत्व से सवाल किए
खबर खास | चंडीगढ़
आम आदमी पार्टी पंजाब के प्रदेश मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने शुक्रवार को श्री आनंदपुर साहिब और अमृतसर की सरायों में बहरीन की एक महिला से जुड़े मामले को लेकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) और शिरोमणि अकाली दल (बादल) के नेतृत्व की कथित चुप्पी पर सवाल उठाए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पन्नू ने सवाल किया कि भारत और विदेशों में रहने वाले पंजाबियों के सामने मामले के पूरे तथ्य कथित तौर पर क्यों नहीं रखे जा रहे हैं। उन्होंने एसजीपीसी नेतृत्व से मामले से जुड़े कई अनुत्तरित सवालों पर जवाब मांगा।
पन्नू ने आरोप लगाया कि मामला केवल कथित वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न पार्टी पदाधिकारियों से पैसे जुटाने से भी जुड़ा है। उन्होंने एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी से कथित धन के लेन-देन को लेकर सवाल किया और पूछा कि कितनी राशि ट्रांसफर हुई, पैसा कहां से आया, किसे मिला और क्या इन लेन-देन का उचित हिसाब रखा गया था।
अकाली नेता विरसा सिंह वल्टोहा और शिकायतकर्ता महिला के बीच कथित ऑडियो क्लिप का जिक्र करते हुए पन्नू ने दावा किया कि बातचीत से कई गंभीर सवाल उठते हैं। उन्होंने एसजीपीसी सदस्य और अकाली दल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अमरजीत सिंह चावला पर लगे आरोपों का भी उल्लेख किया।
पन्नू ने आरोप लगाया कि महिला को आठ महीने तक एक सराय में रखा गया और सवाल किया कि एक अकेली महिला को इतने लंबे समय तक वहां रहने की अनुमति कैसे दी गई। उन्होंने पूछा कि क्या एसजीपीसी के नियमों के तहत ऐसी व्यवस्था की अनुमति है।
वल्टोहा पर निशाना साधते हुए पन्नू ने कुछ नेताओं द्वारा महिला के चरित्र पर सवाल उठाने की कथित कोशिशों पर भी सवाल किया। उन्होंने पूछा कि यदि संबंधित लोगों को मामले की परिस्थितियों की जानकारी थी तो महिला को वहां लाकर इतने लंबे समय तक क्यों रखा गया।
पन्नू ने झिंझर नामक व्यक्ति को कथित तौर पर टिकट दिए जाने की परिस्थितियों पर भी सवाल उठाया और पूछा कि इस मामले में किसके निर्देशों का पालन किया गया।
धामी द्वारा गठित जांच समिति की आलोचना करते हुए पन्नू ने इसे “जूनियरों की समिति” बताया और सवाल किया कि क्या समिति के सदस्य वरिष्ठ नेताओं और आरोपों में नामित अन्य लोगों से प्रभावी तरीके से पूछताछ कर पाएंगे।
उन्होंने पंजाब पुलिस की जांच में सहयोग करने के बजाय सीबीआई जांच की मांग पर भी सवाल उठाया। पन्नू ने कहा कि यदि स्वतंत्र जांच की जरूरत थी तो मामला किसी पूर्व सिख न्यायाधीश या पूर्व सिख आईपीएस अधिकारी को क्यों नहीं सौंपा गया।
पन्नू ने अकाली दल नेता सुखबीर सिंह बादल पर भी निशाना साधते हुए उन्हें एसजीपीसी का “मुख्य संरक्षक” बताया। उन्होंने कहा कि कुछ दिन इंतजार करने से यह मुद्दा खत्म नहीं होगा और आरोप लगाया कि मामले को दबाने की कोशिशों से उठ रहे सवालों का समाधान नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि दुनियाभर में सिख बुद्धिजीवी और समुदाय के युवा एसजीपीसी तथा अकाली नेतृत्व से जवाब मांग रहे हैं।
पन्नू ने धामी को चेतावनी देते हुए कहा कि संस्था के कामकाज को लेकर सवाल उठते रहेंगे। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी नेतृत्व को महिला के सराय में कथित आठ महीने के ठहराव के दौरान उसके साथ क्या हुआ, इससे जुड़े सवालों का जवाब देना होगा।
पन्नू द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। जिन व्यक्तियों और संगठनों का उनके बयानों में नाम लिया गया है, उन्हें इन आरोपों पर जवाब देने और अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।
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