राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री का बयान, पार्टी विलय और संवैधानिक मुद्दों पर उठाए सवाल
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री का बयान, पार्टी विलय और संवैधानिक मुद्दों पर उठाए सवाल
खबर खास | नई दिल्ली
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने मंगलवार को नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के बाद भारतीय जनता पार्टी और हालिया राजनीतिक घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने से किसी भी नेता को कानून से बचने का “सुरक्षा कवच” नहीं मिल सकता। मन्न की यह प्रतिक्रिया उस बयान के बाद आई, जिसमें राज्यसभा सांसद संदीप पाठक ने पंजाब में दर्ज एफआईआर को “झूठा और मनगढ़ंत” बताया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि “बीजेपी के पीछे छिपना संभव नहीं है। यह तरीका कुछ राज्यों में काम कर सकता है, लेकिन पंजाब में नहीं,” और जोर देकर कहा कि पंजाब के लोग किसी भी तरह की धमकी या दबाव के आगे झुकते नहीं हैं, बल्कि उसका मजबूती से जवाब देते हैं।
मुख्यमंत्री मन्न ने राष्ट्रपति को सौंपे अपने ज्ञापन में राजनीतिक दलों के विलय से जुड़े मुद्दों पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि किसी एक सदन के केवल 6–7 सांसद पूरे दल के विलय का दावा करते हैं, तो यह न केवल असंवैधानिक है बल्कि लोकतंत्र की भावना के भी खिलाफ है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ “मजाक” करार दिया। मन्न ने पंजाब में प्रतिनिधित्व के असंतुलन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि राज्य में भाजपा के केवल दो विधायक हैं, लेकिन इसके बावजूद राज्यसभा में उसके छह सांसद हो गए हैं, जो संवैधानिक भावना पर सवाल खड़ा करता है। इसके साथ ही उन्होंने संविधान में “राइट टू रिकॉल” लागू करने की मांग भी दोहराई, ताकि जनता अपने चुने हुए प्रतिनिधियों को जवाबदेह बना सके। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री इस मुलाकात के लिए करीब 90 विधायकों के साथ तीन वोल्वो बसों में नई दिल्ली पहुंचे थे, जहां उन्होंने मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर विस्तार से चर्चा की।
Like
Dislike
Love
Angry
Sad
Funny
Wow
Comments 0