आप नेता ने नशा तस्करी, अकाली दल-भाजपा सरकार के कार्यकाल और भाजपा शासित राज्यों में गैंगस्टरों के नेटवर्क को लेकर उठाए चार सवाल
आप नेता ने नशा तस्करी, अकाली दल-भाजपा सरकार के कार्यकाल और भाजपा शासित राज्यों में गैंगस्टरों के नेटवर्क को लेकर उठाए चार सवाल
खबर खास | चंडीगढ़
आम आदमी पार्टी की पंजाब इकाई के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर 3,000 किलोग्राम तक हेरोइन की खेप पहुंचने के मामले में जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि पंजाब में नशे की समस्या के लिए राज्य को जिम्मेदार ठहराने से पहले केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी को अपने कार्यकाल के दौरान नशा तस्करी रोकने के प्रयासों का हिसाब देना चाहिए।
अमित शाह के नशे से प्रभावित परिवारों से मिलने के लिए पंजाब दौरे का स्वागत करते हुए अरोड़ा ने कहा कि पंजाब की परंपरा मेहमानों का स्वागत करने की रही है। राज्य सरकार अपने कामकाज से जुड़े सवालों का जवाब देने के लिए तैयार है, लेकिन केंद्र सरकार और भाजपा को भी पिछले 12 वर्षों के दौरान अपने कामकाज पर जवाब देना चाहिए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अरोड़ा ने चार प्रमुख सवाल उठाए। इनमें पंजाब-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से नशा तस्करी, गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर हेरोइन की बड़ी खेप पकड़े जाने, वर्ष 2007 से 2017 के दौरान पंजाब में शिरोमणि अकाली दल-भाजपा सरकार की भूमिका और भाजपा शासित राज्यों में कानून-व्यवस्था की स्थिति शामिल है।
अरोड़ा ने पहला सवाल पंजाब की पाकिस्तान के साथ लगती 543 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा को लेकर उठाया। उन्होंने कहा कि सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की है, जो केंद्र सरकार के अधीन काम करता है। उन्होंने पूछा कि केंद्र सरकार सीमा पार से नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने में बार-बार विफल क्यों रही।
अरोड़ा ने दावा किया कि पंजाब सरकार ने सीमा पार से होने वाली तस्करी रोकने के लिए एंटी-ड्रोन प्रणालियां तैनात की हैं। उन्होंने केंद्र से सीमा की सुरक्षा मजबूत करने और नशा तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण मांगा।
दूसरा सवाल गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर पकड़ी गई हेरोइन की बड़ी खेपों को लेकर था। अरोड़ा ने पूछा कि भाजपा शासित गुजरात में बंदरगाह तक 3,000 किलोग्राम तक हेरोइन की खेप कैसे पहुंची और इसके पीछे सक्रिय नेटवर्क के खिलाफ केंद्र सरकार ने क्या ठोस कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि देश के अन्य हिस्सों में नशीले पदार्थों की बड़ी खेप पहुंचने के मामलों पर भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
तीसरा सवाल वर्ष 2007 से 2017 तक पंजाब में अकाली दल-भाजपा सरकार के कार्यकाल से जुड़ा था। अरोड़ा ने कहा कि भाजपा दोनों कार्यकाल में सरकार का हिस्सा रही, उस दौरान पंजाब में नशे की समस्या गंभीर मुद्दा बनी और ‘चिट्टा’ शब्द नशे के संकट से जुड़ गया। उन्होंने पूछा कि उस समय नशा तस्करी और गैंगस्टर संस्कृति के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
अरोड़ा ने चौथा सवाल हरियाणा, महाराष्ट्र और राजस्थान में कानून-व्यवस्था तथा गैंगस्टरों के नेटवर्क को लेकर उठाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को पंजाब पर सवाल उठाने के साथ-साथ भाजपा शासित राज्यों की स्थिति पर भी जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जवाबदेही एकतरफा नहीं हो सकती।
परविंदर सिंह झोटा के परिवार के साथ खड़ी है पंजाब सरकार: अरोड़ा
मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या का जिक्र करते हुए अरोड़ा ने कहा कि पंजाब सरकार शोकाकुल परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने दावा किया कि मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्ती जारी रहेगी।
अरोड़ा ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई में हर स्तर पर जवाबदेही जरूरी है। उनके मुताबिक, केंद्र को सीमा सुरक्षा और नशा तस्करी रोकने के अपने प्रयासों का जवाब देना चाहिए, जबकि पंजाब सरकार राज्य में नशे की समस्या से निपटने के लिए अपनी कार्रवाई जारी रखेगी।
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