गुजरात की दृष्टिबाधित धाविका ने 200 मीटर टी12 स्पर्धा में 25.25 सेकंड का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय दर्ज किया; अब 400 मीटर दौड़ में पदक जीतने पर नजर
गुजरात की दृष्टिबाधित धाविका ने 200 मीटर टी12 स्पर्धा में 25.25 सेकंड का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय दर्ज किया; अब 400 मीटर दौड़ में पदक जीतने पर नजर
खबर खास | खेल
जिंदगी की चुनौतियों को पीछे छोड़कर पदक जीतने का सपना लेकर जापान पहुंचीं भारत की पैरा एथलीट तेजल्बेन अमराजी डामोर ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में कांस्य पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया है। गुजरात के दाहोद जिले की 24 वर्षीय दृष्टिबाधित धाविका ने मंगलवार को नागोया में महिलाओं की 200 मीटर टी12 स्पर्धा में यह उपलब्धि हासिल की। प्रतियोगिता में अपने पदार्पण पर उन्होंने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय भी दर्ज किया। तेजल्बेन ने कहा कि वह तमाम मुश्किलों के बावजूद पदक लेकर ही लौटने के संकल्प के साथ प्रतियोगिता में उतरी थीं।
तेजल्बेन ने कहा कि इस मुकाम तक पहुंचने के पीछे काफी संघर्ष, मेहनत और मजबूत इच्छाशक्ति रही है। उन्होंने बताया कि टीम ने बड़ी उम्मीदों के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था और उनका लक्ष्य देश के लिए पदक जीतना था। उनके अनुसार, कठिन परिस्थितियों ने उनके संकल्प को कमजोर नहीं किया, बल्कि बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा दी।
कोच की मेहनत और अनुशासन को दिया सफलता का श्रेय
गांधीनगर स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र में प्रशिक्षण लेने वाली तेजल्बेन ने 200 मीटर स्पर्धा की हीट में 25.25 सेकंड का समय निकालकर फाइनल में जगह बनाई। इससे पहले उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय 25.47 सेकंड था, जो उन्होंने सितंबर में दुबई पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में स्वर्ण पदक जीतते समय दर्ज किया था।
तेजल्बेन ने अपनी सफलता का श्रेय कोच के मार्गदर्शन, नियमित अभ्यास और अनुशासन को दिया। उन्होंने कहा कि रविवार को आराम का दिन होने के बावजूद उनके कोच ने प्रशिक्षण में निरंतरता बनाए रखी। निर्धारित अभ्यास सत्रों में कोच की मौजूदगी और समर्पण ने उनकी तैयारी को मजबूत किया।
वर्ष 2022 में पैरा एथलेटिक्स का सफर शुरू करने वाली तेजल्बेन ने 2025 की विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में छठा स्थान हासिल किया था। इसके बाद उन्होंने 2026 की राष्ट्रीय चैंपियनशिप और दुबई पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में स्वर्ण पदक जीते। उनकी खेल तैयारियों के लिए युवा मामले और खेल मंत्रालय ने वार्षिक प्रशिक्षण एवं प्रतियोगिता कैलेंडर के तहत 2,05,961 रुपये की वित्तीय सहायता भी दी है।
अब तेजल्बेन की नजर अपनी मुख्य स्पर्धा 400 मीटर टी12 पर है। उनका मानना है कि 200 मीटर में मिला कांस्य पदक अगले मुकाबले के लिए आत्मविश्वास बढ़ाएगा। वह भविष्य में दाहोद में दृष्टिबाधित बच्चों के लिए समर्पित दौड़ ट्रैक स्थापित करने की भी इच्छा रखती हैं, ताकि उन्हें खेलों में आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिल सकें।
तेजल्बेन डामोर की यह उपलब्धि संघर्ष, दृढ़ संकल्प और मेहनत की मिसाल है। कांस्य पदक जीतकर उन्होंने एशियन पैरा गेम्स में नया इतिहास रचा और देश का गौरव बढ़ाया।
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