VIP के लिए अलग नियम होने का आरोप, परीक्षा केंद्र में फोटो कैसे पहुंची? जांच और CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग
VIP के लिए अलग नियम होने का आरोप, परीक्षा केंद्र में फोटो कैसे पहुंची? जांच और CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग
पूर्व पंजाब मुख्यमंत्री और सांसद चरणजीत सिंह चन्नी की पंजाब यूनिवर्सिटी में परीक्षा देते हुए तस्वीर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। तस्वीर सामने आने के बाद यूनिवर्सिटी की परीक्षा व्यवस्था, सुरक्षा नियमों और सभी परीक्षार्थियों के लिए नियमों के समान पालन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्ष की ओर से मामले की जांच के साथ परीक्षा रद्द करने की मांग भी सामने आई है।
दरअसल, चरणजीत सिंह चन्नी हाल ही में पंजाब यूनिवर्सिटी में एमए लोक प्रशासन की परीक्षा देने पहुंचे थे। 21 अगस्त को सामने आई तस्वीर में वह परीक्षा कक्ष के भीतर परीक्षा देते नजर आ रहे हैं। तस्वीर वायरल होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि परीक्षा हॉल के अंदर तस्वीर किसने खींची और प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण परीक्षा केंद्र तक कैसे पहुंचा।
चंडीगढ़ के पूर्व मेयर और पंजाब यूनिवर्सिटी की पूर्व सीनेट एवं सिंडिकेट के सदस्य देवेश मौदगिल ने मामले की जांच की मांग की है। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी के चांसलर सीपी राधाकृष्णन, कुलपति मीनाक्षी गोयल, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान तथा पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने ने सवाल उठाया कि जब परीक्षा केंद्र में मोबाइल फोन, कैमरा, स्मार्टवॉच, ईयरफोन, टैबलेट और लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण प्रतिबंधित हैं, तो परीक्षा कक्ष के अंदर तस्वीर खींचने वाला उपकरण कैसे पहुंचा। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि तस्वीर किस व्यक्ति ने और किस उपकरण से खींची थी।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर चन्नी को निर्धारित परीक्षा प्रक्रिया से अलग किसी विशेष व्यवस्था के तहत परीक्षा देने की अनुमति दी गई थी, तो वह किस नियम और किस श्रेणी के तहत दी गई। साथ ही परीक्षा हॉल के अंदर खींची गई तस्वीर बाहर कैसे आई, इसकी भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने ने आरोप लगाया कि अगर आम छात्रों के लिए परीक्षा केंद्र में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाना प्रतिबंधित है, तो किसी VIP के लिए अलग नियम नहीं होने चाहिए। उनका कहना है कि परीक्षा व्यवस्था में सभी परीक्षार्थियों के लिए नियम समान रूप से लागू किए जाने चाहिए।
उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन से परीक्षा केंद्र की CCTV रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की भी मांग की है। उनका कहना है कि CCTV फुटेज से यह स्पष्ट हो सकता है कि परीक्षा केंद्र में कौन-कौन लोग दाखिल हुए और क्या किसी प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का इस्तेमाल हुआ।
उनके मुताबिक सामान्य विद्यार्थी के पास प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिलने पर विश्वविद्यालय नियमों के तहत यूएमसी की कार्रवाई की जाती है। ऐसे में यदि जांच के दौरान चन्नी की परीक्षा में भी नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो उनके मामले में भी समान नियम लागू किए जाने चाहिए।
उन्होंने नियमों का उल्लंघन साबित होने की स्थिति में यूएमसी दर्ज करने, परीक्षा रद्द करने और नियमानुसार दो साल के लिए परीक्षा से प्रतिबंधित करने की मांग की है। फिलहाल वायरल तस्वीर को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है और यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से जांच के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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