चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर सात दिवसीय पक्का मोर्चा जारी, मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज करने की चेतावनी
चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर सात दिवसीय पक्का मोर्चा जारी, मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज करने की चेतावनी
चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा का सात दिवसीय पक्का मोर्चा लगातार जारी है। पंजाब के अलग-अलग गांवों से किसानों और महिलाओं का काफिला लगातार बढ़ रहा है। वीरवार को भी बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ आंदोलन स्थल पर पहुंचे। किसानों ने पानी के संकट, कृषि संबंधी मांगों, गन्ने के दाम और लैंड पूलिंग नीति को लेकर केंद्र और पंजाब सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई।
किसान नेता हरिंदर सिंह लख्खोवाल ने बताया कि चंडीगढ़ और पुलिस अधिकारियों की ओर से उनसे बातचीत की गई है और दोपहर दो बजे तक का समय दिया गया था। उन्होंने कहा कि केंद्र और पंजाब सरकार की ओर से बैठक के लिए बुलावा आने की उम्मीद है। अगर दोनों सरकारें बातचीत के लिए आगे नहीं आतीं तो किसान संगठन बड़ा फैसला लेंगे। इस संबंध में शुक्रवार को मोर्चे की अहम बैठक बुलाई गई है, जिसमें आंदोलन को आगे बढ़ाने को लेकर रणनीति तय की जाएगी।
किसान नेताओं ने कहा कि जरूरत पड़ने पर मोर्चे का विस्तार किया जा सकता है। उन्होंने पंजाब सरकार से विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग करते हुए पानी से जुड़े पुराने समझौतों और लैंड पूलिंग नीति को रद्द करने की मांग की। इसके साथ ही बासमती, मूंग, मक्का, आलू, मटर और गोभी जैसी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर खरीद की गारंटी देने की मांग भी उठाई गई।
वीरवार को पंजाबी गायक रेशम सिंह अनमोल भी किसान मोर्चे में पहुंचे। उन्होंने किसानों के साथ समय बिताने के साथ लंगर सेवा में भी हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने लंगर तैयार कर रही महिलाओं के पैर दबाकर उनका सम्मान किया, जिसकी मोर्चे में मौजूद किसानों ने सराहना की।
मोहाली में जगतपुरा से चंडीगढ़ के सेक्टर-48 की ओर जाने वाली सड़क के एक हिस्से पर किसानों ने मोर्चा लगाया हुआ है, जबकि सड़क के दूसरे हिस्से पर यातायात सामान्य रूप से चल रहा है। वीरवार को बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियां पहुंचने के कारण इन्हें सड़क किनारे और उपलब्ध स्थानों पर खड़ा किया गया। किसान नेताओं का कहना है कि अगर आने वाले दिनों में वाहनों की संख्या और बढ़ी तो यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने भी केंद्र सरकार को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका के साथ ऐसा कोई समझौता किया जाता है जिससे किसानों के हित प्रभावित होते हैं तो देशभर में चक्का जाम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने किसानों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया तो सेक्टर-48 के पास चल रहा पक्का मोर्चा आगे भी बढ़ाया जा सकता है। किसानों का कहना है कि वे अपनी मांगें पूरी होने के बाद ही आंदोलन खत्म करेंगे।
आंदोलन में शामिल किसानों और मजदूरों के लिए मोहाली में 15 से अधिक लंगर भी चलाए जा रहे हैं। एक सितंबर से इन लंगरों के जरिए किसानों को सुबह, दोपहर और रात का भोजन, चाय-पानी समेत जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। भारतीय किसान यूनियन के मोहाली समेत विभिन्न जिलों के किसान इन लंगरों की सेवा संभाल रहे हैं। यूनियन के राज्य प्रेस सचिव परमदीप सिंह बैदवान ने बताया कि मोहाली के किसान भी इस सेवा में लगातार सहयोग कर रहे हैं।
इस किसान आंदोलन में सुनाम के गांव अलीशेर कलां निवासी राजपाल सिंह भी अपने बेटे को खोने का दर्द दिल में लिए किसानों के साथ डटे हुए हैं। दिल्ली के किसान आंदोलन के दौरान उनके बेटे बलविंदर सिंह की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। गंभीर हालत में उसे बठिंडा ले जाया गया और बाद में चंडीगढ़ में भी इलाज कराया गया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।
बेटे की मौत के बावजूद राजपाल सिंह ने किसान संघर्ष से खुद को अलग नहीं किया। उन्होंने भावुक होकर बताया कि उनका बेटा बलविंदर सिंह भी किसान आंदोलन में सक्रिय रूप से हिस्सा लेता था और किसानों के हक के लिए हमेशा आवाज उठाता था। राजपाल सिंह का कहना है कि बेटे की इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए वह भविष्य में भी किसानों के हर संघर्ष में उनके साथ खड़े रहेंगे।
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