बेअंत सिंह हत्याकांड में सजा-ए-मौत का सामना कर रहे राजोआना की याचिका का निपटारा, प्राइवेट अस्पताल के बजाय PGI में जांच और जरूरत पड़ने पर पुलिस सुरक्षा में ऑपरेशन
बेअंत सिंह हत्याकांड में सजा-ए-मौत का सामना कर रहे राजोआना की याचिका का निपटारा, प्राइवेट अस्पताल के बजाय PGI में जांच और जरूरत पड़ने पर पुलिस सुरक्षा में ऑपरेशन
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड में सजा-ए-मौत का सामना कर रहे और पटियाला सेंट्रल जेल में बंद बलवंत सिंह राजोआना को अपनी आंखों के इलाज को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से राहत मिली है। जस्टिस जसजीत सिंह बेदी की अदालत ने राजोआना की आंखों के ऑपरेशन से संबंधित याचिका का निपटारा करते हुए स्पष्ट किया कि उनका इलाज किसी निजी अस्पताल में नहीं होगा। आंखों की जांच और जरूरत पड़ने पर ऑपरेशन PGI चंडीगढ़ में ही कराया जाएगा।
सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल की दलीलों पर विचार करते हुए अदालत ने टिप्पणी की कि आम लोग भी बेहतर इलाज के लिए PGI को प्राथमिकता देते हैं। ऐसे में राजोआना को निजी अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति देने के पीछे अदालत को कोई ठोस आधार नजर नहीं आया।
विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह पर होगा ऑपरेशन
हाईकोर्ट ने राजोआना को PGI चंडीगढ़ जाकर अपनी आंखों की जांच कराने की अनुमति दी है। यदि विशेषज्ञ डॉक्टर जांच के बाद ऑपरेशन को जरूरी मानते हैं, तो उनका ऑपरेशन PGI में ही पुलिस सुरक्षा के बीच कराया जाएगा।
दरअसल, जनवरी 2026 में PGI में हुई जांच के दौरान राजोआना की आंखों में मोतियाबिंद होने की पुष्टि हुई थी। पटियाला सेंट्रल जेल के अस्पताल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्होंने इलाज के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था।
निजी अस्पताल में ऑपरेशन की मांगी थी अनुमति
राजोआना ने अपनी याचिका में बताया था कि पावर वाला चश्मा पहनने के कारण उन्हें आंखों में एलर्जी और खुजली जैसी परेशानी होती है। इसी आधार पर उन्होंने अपने खर्चे पर पटियाला स्थित डॉ. आर.एस. रंधावा आई अस्पताल में आंखों का ऑपरेशन कराने की अनुमति मांगी थी। उनकी मांग थी कि ऑपरेशन के बाद उन्हें वापस पटियाला सेंट्रल जेल भेज दिया जाए।
हालांकि हाईकोर्ट ने निजी अस्पताल में ऑपरेशन की अनुमति देने के बजाय PGI चंडीगढ़ में इलाज कराने का रास्ता साफ किया है। अब राजोआना की आंखों की आगे की जांच PGI में होगी और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह के आधार पर ऑपरेशन का फैसला लिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर पूरी प्रक्रिया पुलिस सुरक्षा में संपन्न कराई जाएगी।
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