जिले में अब तक एक भी केस नहीं, 1.32 लाख गोवंश का हुआ टीकाकरण; गांवों और गोशालाओं में बढ़ाई निगरानी
जिले में अब तक एक भी केस नहीं, 1.32 लाख गोवंश का हुआ टीकाकरण; गांवों और गोशालाओं में बढ़ाई निगरानी
हरियाणा के कई जिलों में लंपी स्किन डिजीज के मामले सामने आने के बाद हिसार में पशुपालन विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। जिले में बीमारी की रोकथाम और गोवंश की निगरानी के लिए 21 पशु चिकित्सकों के नेतृत्व में खंड स्तर पर सात विशेष टीमें गठित की गई हैं। प्रत्येक टीम में तीन पशु चिकित्सक, एक बीएलडीए और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल है। इसके अलावा सात मोबाइल वैन भी गांव-गांव जाकर गोवंश की जांच कर रही हैं।
हिसार जिले में फिलहाल लंपी स्किन डिजीज का एक भी मामला सामने नहीं आया है। बीमारी के लक्षण मिलने के बाद जांच के लिए भेजे गए पांच गोवंश के सैंपल भी निगेटिव पाए गए हैं। जिले में मौजूद करीब 1.50 लाख गोवंश में से 1.32 लाख का टीकाकरण पूरा किया जा चुका है। विभाग की ओर से बाकी गोवंश के टीकाकरण और निगरानी पर भी लगातार नजर रखी जा रही है।
जिले की सभी 69 गोशालाओं में भी विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा है। पशुपालकों और गोशाला संचालकों को बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने के साथ साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। पशुओं के आसपास पानी जमा न होने देने और मक्खी-मच्छरों से बचाव के जरूरी उपाय करने की सलाह दी गई है।
त्वचा पर गांठ, तेज बुखार, खाना कम करना, दूध उत्पादन में गिरावट, आंख या नाक से पानी आना और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर पशु को तुरंत दूसरे पशुओं से अलग किया जा रहा है। इसके बाद पशु चिकित्सकों की टीम उसकी जांच कर रही है। विभाग की ओर से गोशालाओं और ग्रामीण इलाकों में टीकाकरण की स्थिति की भी लगातार निगरानी की जा रही है।
पशुपालकों की मदद के लिए 1962 टोल फ्री सेवा भी शुरू की गई है। किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिखाई देने या चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होने पर पशुपालक इस नंबर पर सूचना दे सकते हैं। सूचना मिलने के बाद विभाग की टीम आवश्यक कार्रवाई करेगी। बीमारी की स्थिति की रोजाना रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जा रही है।
अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल हिसार में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और बॉर्डर एरिया सील करने जैसी स्थिति सामने नहीं आई है। जिले में लंपी से बचाव के लिए व्यापक स्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं। जुलाई में ही करीब 98 प्रतिशत गोवंश के टीकाकरण का लक्ष्य पूरा कर लिया गया था।
पशुपालन विभाग का कहना है कि फिलहाल पशुपालकों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्कता बेहद जरूरी है। गोशालाओं और ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार जांच के साथ-साथ बीमारी के संभावित लक्षणों पर नजर रखी जा रही है, ताकि संक्रमण का कोई मामला सामने आने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
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