दलीप ट्रॉफी के फाइनल और ईरानी कप में शानदार प्रदर्शन के बाद 21 वर्षीय झारखंड के बल्लेबाज को इंडिया-ए टीम में मिली जगह, अब राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की नजरों में आए
दलीप ट्रॉफी के फाइनल और ईरानी कप में शानदार प्रदर्शन के बाद 21 वर्षीय झारखंड के बल्लेबाज को इंडिया-ए टीम में मिली जगह, अब राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की नजरों में आए
खबर खास | खेल
भारतीय घरेलू क्रिकेट में एक और युवा प्रतिभा तेजी से उभरकर सामने आई है। झारखंड के 21 वर्षीय बाएं हाथ के बल्लेबाज शिखर मोहन को न्यूजीलैंड-ए के खिलाफ अंतिम दो अनौपचारिक टेस्ट मैचों के लिए इंडिया-ए टीम में जगह मिली है। हाल के मुकाबलों में लगातार अच्छे प्रदर्शन के बाद उनका नाम चर्चा में आया है। इस चयन ने उन्हें भारतीय टेस्ट टीम के लिए भविष्य के संभावित दावेदारों की सूची में शामिल कर दिया है।
मोहन का चयन केवल 12 प्रथम श्रेणी मैच खेलने के बाद हुआ है। इससे पता चलता है कि घरेलू क्रिकेट में निरंतर अच्छा प्रदर्शन करने वाले युवा खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल सकता है। दलीप ट्रॉफी के फाइनल और ईरानी कप में उनके प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं का ध्यान आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
चेन्नई में दक्षिण क्षेत्र के खिलाफ दलीप ट्रॉफी फाइनल में मोहन ने दोनों पारियों में क्रमशः 85 और 52 रन बनाए। दबाव वाले मुकाबले में स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ उनकी बल्लेबाजी ने उनकी क्षमता को सामने रखा। उन्होंने अपनी उपयोगिता बल्लेबाजी तक सीमित नहीं रखी और पहली पारी में बाएं हाथ की स्पिन गेंदबाजी करते हुए 20 ओवर भी डाले।
दलीप ट्रॉफी और ईरानी कप में प्रदर्शन से बढ़ी पहचान
दलीप ट्रॉफी के बाद मोहन ने ईरानी कप में भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया। जम्मू-कश्मीर के खिलाफ रेस्ट ऑफ इंडिया की ओर से खेलते हुए उन्होंने 60 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली। ऐसी पिच पर, जहां तेज गेंदबाजों को मदद मिल रही थी, उन्होंने धैर्य और तकनीकी अनुशासन के साथ बल्लेबाजी की। इस पारी ने अलग-अलग परिस्थितियों में रन बनाने की उनकी क्षमता को भी उजागर किया।
रणजी ट्रॉफी में भी मोहन ने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। 2026-27 सत्र की शुरुआत में केरल के खिलाफ उन्होंने 196 गेंदों पर 143 रन बनाए। रिपोर्टों के अनुसार, वह इस सत्र में रणजी ट्रॉफी का पहला शतक लगाने वाले बल्लेबाज बने। उनकी बल्लेबाजी में धैर्य के साथ रन बनाने की क्षमता दिखाई देती है, जिसने उन्हें झारखंड के उभरते खिलाड़ियों में प्रमुख स्थान दिलाया है।
मोहन के क्रिकेट करियर को आगे बढ़ाने में उनके परिवार का भी योगदान रहा है। उनके पिता ने अपने शुरुआती जीवन में क्रिकेट खेला था और बेटे को इस खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। मोहन विराट कोहली को अपना आदर्श मानते हैं और उनकी आक्रामकता, तैयारी तथा बल्लेबाजी के तरीके से प्रेरित हैं। महेंद्र सिंह धोनी भी उनके पसंदीदा क्रिकेटरों में शामिल हैं।
इंडिया-ए टीम में चयन अब मोहन को उच्च स्तर पर खेलने और अपनी प्रतिभा साबित करने का अवसर देगा। हालांकि, इंडिया-ए में जगह मिलना सीनियर भारतीय टेस्ट टीम में चयन की गारंटी नहीं है, लेकिन हालिया प्रदर्शन ने उन्हें राष्ट्रीय चयन की दौड़ में एक उभरते हुए बल्लेबाज के रूप में जरूर स्थापित किया है।
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