2027 चुनाव से पहले बोले पूर्व CM—पंजाब में भाजपा के पास अभी जरूरी जमीनी समर्थन नहीं, अकाली दल से गठबंधन की वकालत
2027 चुनाव से पहले बोले पूर्व CM—पंजाब में भाजपा के पास अभी जरूरी जमीनी समर्थन नहीं, अकाली दल से गठबंधन की वकालत
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने भाजपा में अपने करीब चार साल के राजनीतिक सफर को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें वास्तव में कुछ हासिल नहीं हुआ, लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस में लौटने की उनकी कोई योजना नहीं है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सक्रिय चुनावी राजनीति में उनकी भूमिका अब सीमित हो चुकी है।
2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले एक इंटरव्यू में 84 वर्षीय कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने कहा कि जब कोई व्यक्ति किसी राजनीतिक दल में शामिल होता है तो उसे उम्मीद रहती है कि उसके अनुभव और सलाह का इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उन्होंने पंजाब को करीब 60 वर्षों से देखा और समझा है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह यह दावा नहीं करते कि उनके पास पंजाब से जुड़े हर सवाल का जवाब है, लेकिन राज्य की राजनीति और परिस्थितियों की उन्हें अच्छी समझ है।
भाजपा में शामिल होने के फैसले पर पछतावे के सवाल पर कैप्टन ने कहा कि उन्हें कोई पछतावा नहीं है। वहीं, भाजपा में बने रहने को लेकर उन्होंने कहा कि उनके सामने फिलहाल कोई दूसरा विकल्प नहीं है। उन्होंने अकाली दल में जाने की संभावना से इनकार किया और कहा कि उन्हें नहीं लगता कि कांग्रेस उन्हें वापस लेगी। उनके मुताबिक कांग्रेस इस समय खुद आंतरिक चुनौतियों से जूझ रही है और उसे पहले अपनी स्थिति मजबूत करने की जरूरत है।
2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने कहा कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि किस राजनीतिक दल को फायदा होगा। आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी यह भूल गई है कि वह सत्ता में है और उसकी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि अकाली दल कई गुटों में बंटने के कारण तेजी से अपना आधार खो रहा है, जबकि कांग्रेस में भी विभाजन की स्थिति है। उनके अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में मुख्य मुकाबला आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच हो सकता है, जबकि भाजपा को जमीनी स्तर पर अपना समर्थन मजबूत करने के लिए अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा।
कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने लंबे समय से जेल में बंद सिख कैदियों की रिहाई का भी समर्थन किया। इनमें बेअंत सिंह हत्याकांड मामले में सजा काट रहे जगतार सिंह हवारा का नाम भी शामिल है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति कानूनी रूप से निर्धारित उम्रकैद की अवधि से अधिक समय जेल में रह चुका है, तो उसे लगातार जेल में रखना न्यायसंगत नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने पंजाब में भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के बीच दोबारा गठबंधन की भी वकालत की। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा पंजाब में सरकार बनाना चाहती है तो उसे अपने पुराने सहयोगी अकाली दल के साथ गठबंधन पर विचार करना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि दोनों दल पहले भी कई बार मिलकर पंजाब में सरकार बना चुके हैं और ऐसे में दोनों के बीच दोबारा गठबंधन में क्या परेशानी है, यह समझना मुश्किल है।
अमृतपाल सिंह को लेकर भी कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने अपनी राय रखी। उन्होंने खडूर साहिब के सांसद और ‘वारिस पंजाब दे’ के प्रमुख की जेल से रिहाई की मांग करते हुए कहा कि उन्हें बाहर आकर चुनाव लड़ने का मौका मिलना चाहिए। कैप्टन के मुताबिक, किसी नेता को लंबे समय तक जेल में रखने से उसके प्रति लोगों की लोकप्रियता बढ़ सकती है।
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