सरकार ने विस्तृत, तथ्यात्मक और डेटा-आधारित उत्तर प्रस्तुत करते हुए बताया कि एमएसएमई भुगतान में देरी से निपटने के लिए कानूनी, वित्तीय और तकनीक आधारित कई मजबूत व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।
सरकार ने विस्तृत, तथ्यात्मक और डेटा-आधारित उत्तर प्रस्तुत करते हुए बताया कि एमएसएमई भुगतान में देरी से निपटने के लिए कानूनी, वित्तीय और तकनीक आधारित कई मजबूत व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।
खबर खास, नई दिल्ली :
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की आर्थिक स्थिरता और रोजगार सुरक्षा को लेकर अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा ने संसद में एमएसएमई को बड़े कॉरपोरेट्स, सीपीएसई और सरकारी विभागों द्वारा किए जा रहे विलंबित भुगतान का अहम मुद्दा उठाया।
स्टार्ड प्रश्न के माध्यम से शर्मा ने सरकार से यह जानना चाहा कि एमएसएमई को बकाया भुगतान की वास्तविक स्थिति क्या है, समाधान पोर्टल पर लंबित मामलों का विवरण क्या है, लगातार भुगतान में देरी करने वालों पर क्या सख्त कार्रवाई की जा रही है, और एमएसएमई को कार्यशील पूंजी संकट से उबारने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
राज्यसभा में सरकार ने विस्तृत, तथ्यात्मक और डेटा-आधारित उत्तर प्रस्तुत करते हुए बताया कि एमएसएमई भुगतान में देरी से निपटने के लिए कानूनी, वित्तीय और तकनीक आधारित कई मजबूत व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सीपीएसई द्वारा एमएसएमई को देय कुल ₹17,400.13 करोड़ में से ₹14,744.54 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। 4 फरवरी 2026 तक शेष बकाया राशि ₹2,655.60 करोड़ है। साथ ही एमएसएमई समाधान पोर्टल पर पिछले तीन वर्षों में लंबित मामलों और संबंधित राशियों का वर्ष-वार विवरण भी सदन के पटल पर रखा गया।
सरकार ने बताया कि समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए सख्त प्रावधान लागू हैं। 45 दिनों से अधिक देरी पर एमएसएमई को किया जाने वाला भुगतान आयकर में तभी मान्य होगा जब वास्तविक भुगतान किया जाए। इसके अतिरिक्त, कंपनियों को एमएसएमई के लंबित भुगतान का अर्धवार्षिक खुलासा करना अनिवार्य किया गया है। एमएसएमईडी अधिनियम के तहत देरी पर RBI बैंक दर से तीन गुना ब्याज, वह भी मासिक चक्रवृद्धि आधार पर, देना अनिवार्य है।
विवादों के शीघ्र समाधान के लिए एक डिजिटल ऑनलाइन विवाद समाधान प्रणाली भी लागू की गई है, जिसके तहत अब सभी नए विलंबित भुगतान मामले ऑनलाइन दर्ज किए जा रहे हैं, ताकि प्रक्रिया तेज़, पारदर्शी और कम लागत वाली हो।
कार्यशील पूंजी की समस्या को कम करने के लिए सरकार ने ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम के माध्यम से इनवॉयस फाइनेंसिंग में उल्लेखनीय विस्तार की जानकारी दी। पिछले तीन वर्षों में ट्रेड्स के माध्यम से एमएसएमई को मिलने वाली फंडिंग में तेज़ वृद्धि हुई है। बजट घोषणाओं के तहत सीपीएसई के लिए ट्रेड्स का उपयोग अनिवार्य किया गया है, इनवॉयस डिस्काउंटिंग पर क्रेडिट गारंटी का प्रावधान किया गया है और सरकारी खरीद डेटा को वित्तीय संस्थानों से जोड़ने की व्यवस्था की गई है।
इसके अलावा सरकार ने एमएसएमई के लिए क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी, इक्विटी फंडिंग, बढ़ी हुई क्रेडिट गारंटी सीमा, निर्यातक एमएसएमई के लिए उच्च ऋण सीमा और उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत सूक्ष्म उद्यमों के लिए कस्टमाइज्ड क्रेडिट कार्ड जैसी पहलों को भी रेखांकित किया।सरकार के उत्तर का स्वागत करते हुए कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि एमएसएमई की असफलता का कारण क्षमता की कमी नहीं, बल्कि नकदी प्रवाह में रुकावट होती है।
उन्होंने कहा,“समय पर भुगतान एमएसएमई के लिए जीवनरेखा है। सख्त प्रवर्तन, पारदर्शी सिस्टम और आसान वित्तीय पहुंच से ही रोजगार बचेगा और सप्लाई चेन मज़बूत होगी।” शर्मा ने दोहराया कि संसद के माध्यम से निरंतर निगरानी और डेटा-आधारित नीति निर्माण एमएसएमई को सशक्त बनाने और उन्हें भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ बनाए रखने के लिए अनिवार्य है।
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