30 दिनों के भीतर भुगतान न होने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी; हरियाणा को भी भेजा गया ₹312.59 करोड़ का नहर रखरखाव का दावा
30 दिनों के भीतर भुगतान न होने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी; हरियाणा को भी भेजा गया ₹312.59 करोड़ का नहर रखरखाव का दावा
खबर खास | चंडीगढ़
पंजाब सरकार ने पंजाब से आपूर्ति किए जाने वाले नदियों के पानी के एवज में राजस्थान से रॉयल्टी और मुआवजे के तौर पर ₹1.44 लाख करोड़ की मांग की है। राज्य सरकार ने अंतिम मांग नोटिस जारी करते हुए राजस्थान को 30 दिनों के भीतर यह राशि जमा कराने का निर्देश दिया है।
पंजाब ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया गया, तो विधिक प्रक्रिया (कानूनी कार्रवाई) शुरू की जाएगी।
पंजाब के अनुसार, यह दावा 1961 से 2025 के बीच राजस्थान द्वारा इस्तेमाल किए गए नदियों के पानी की रॉयल्टी से जुड़ा है। राजस्थान के जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को भेजे पत्र में पंजाब सरकार ने कहा कि पिछले पत्राचारों के बावजूद इस बकाया राशि का निपटारा नहीं हुआ है।
पंजाब ने इससे पहले भी 18 मार्च और 4 मई को राजस्थान को पत्र लिखे थे, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका था।
पंजाब सरकार ने अपने दावे का आधार 4 सितंबर, 1920 को शिमला में बीकानेर, बहावलपुर और पंजाब के तत्कालीन शासकों के बीच हुए जल-साझाकरण (Water Sharing) समझौते को बनाया है। पंजाब के अनुसार, बीकानेर रियासत पानी की आपूर्ति के बदले प्रति वर्ष ₹6.50 प्रति एकड़ की दर से उपकर (cess) चुकाती थी।
पंजाब ने अब इस बकाये का पुनर्मूल्यांकन ₹141.20 प्रति एकड़ प्रति वर्ष की वर्तमान दर पर किया है। इसमें औसतन 10 मिलियन एकड़-फीट (MAF) पानी की आपूर्ति पर रॉयल्टी और 8 प्रतिशत का ब्याज भी जोड़ा गया है। राज्य का यह भी कहना है कि सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) लागू होने तक राजस्थान लगातार रॉयल्टी का भुगतान कर रहा था।
इसी बीच, पंजाब ने हरियाणा के खिलाफ भी एक अलग वित्तीय मांग रखी है। पंजाब के मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा ने हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी को पत्र लिखकर भाखड़ा नहर प्रणाली की साझा वाहक नहरों (shared carrier canals) के संचालन और रखरखाव (O&M) के लिए ₹312.59 करोड़ मांगे हैं।
इस मांग में शामिल हैं:
पटियाला डिविजन (भाखड़ा मेन लाइन): ₹281.78 करोड़
मानसा डिविजन: ₹30.80 करोड़
पंजाब का आरोप है कि हरियाणा ने वर्ष 2015-16 के बाद से नहर रखरखाव के खर्चों में अपने हिस्से का भुगतान नहीं किया है।
इन दोनों मांगों ने पंजाब, राजस्थान और हरियाणा के बीच अंतर-राज्यीय जल और नहर प्रणालियों के वित्तीय विवाद को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। पंजाब ने साफ संकेत दिया है कि वह अपने लंबे समय से लंबित बकाये की वसूली को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाने जा रहा है।
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January 18, 2026
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