नई तकनीक से खिलाड़ियों की फिटनेस, मांसपेशियों की ताकत, शरीर की गतिविधियों, दौड़ने की गति और रिकवरी पर रखी जाएगी नजर; वैज्ञानिक आकलन के आधार पर कोच तैयार कर सकेंगे प्रशिक्षण योजनाएं
नई तकनीक से खिलाड़ियों की फिटनेस, मांसपेशियों की ताकत, शरीर की गतिविधियों, दौड़ने की गति और रिकवरी पर रखी जाएगी नजर; वैज्ञानिक आकलन के आधार पर कोच तैयार कर सकेंगे प्रशिक्षण योजनाएं
खबर खास | चंडीगढ़
पंजाब सरकार प्रमुख अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं, खासकर आगामी एशियाई खेलों की तैयारियों को मजबूत करने के लिए खिलाड़ियों के प्रशिक्षण में आधुनिक खेल विज्ञान तकनीक शामिल करने की योजना बना रही है। इसके तहत खेल विभाग 50 ऐसे वियरेबल बैंड खरीदने की तैयारी कर रहा है, जो खिलाड़ियों की शारीरिक गतिविधियों और रिकवरी की लगातार निगरानी कर सकेंगे। इसके साथ ही पांच श्रेणियों वाले विशेष बायोमैकेनिक्स जांच उपकरण भी खरीदे जाने प्रस्तावित हैं।
इस पहल का उद्देश्य खेल प्रशिक्षण में वैज्ञानिक आकलन को बढ़ावा देना है। इससे कोच और खेल विशेषज्ञ केवल पारंपरिक फिटनेस परीक्षण या देखकर किए जाने वाले आकलन पर निर्भर रहने के बजाय खिलाड़ियों के प्रदर्शन से जुड़े मापने योग्य आंकड़ों के आधार पर उनकी तैयारी का मूल्यांकन कर सकेंगे।
फिटनेस और रिकवरी की निगरानी करेंगे वियरेबल बैंड
प्रस्तावित 50 वियरेबल मॉनिटरिंग बैंड खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति और गतिविधियों से जुड़ी जानकारी दर्ज करने में मदद करेंगे। इनके तकनीकी फीचर्स के अनुसार हृदय गति के रुझान, शारीरिक गतिविधियों और रिकवरी से जुड़े संकेतकों पर नजर रखी जा सकेगी।
इनसे मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर कोच यह समझ सकेंगे कि खिलाड़ी अलग-अलग स्तर के प्रशिक्षण का किस तरह सामना कर रहे हैं। इससे थकान के संकेत पहचानने और जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण की तीव्रता घटाने-बढ़ाने या अतिरिक्त आराम देने का फैसला लेने में मदद मिल सकती है।
पांच आधुनिक तकनीकों से ताकत और प्रदर्शन का आकलन
प्रस्तावित बायोमैकेनिक्स जांच प्रणाली में फोर्स प्लेट्स, हैमस्ट्रिंग स्ट्रेंथ टेस्टिंग सिस्टम, इनर्शियल मेजरमेंट यूनिट्स (आईएमयू), इलेक्ट्रोमायोग्राफी (ईएमजी) और टाइमिंग गेट्स शामिल होंगे।
फोर्स प्लेट्स: दो फोर्स प्लेट्स खिलाड़ियों के खड़े होने, कूदने और अन्य शारीरिक गतिविधियों के दौरान उत्पन्न होने वाले बल को मापेंगी। इससे मांसपेशियों की ताकत, शरीर का संतुलन, छलांग लगाने की क्षमता और दोनों पैरों के बीच बल के अंतर का आकलन किया जा सकेगा।
हैमस्ट्रिंग स्ट्रेंथ टेस्टिंग सिस्टम: यह उपकरण जांघ के पीछे स्थित हैमस्ट्रिंग मांसपेशियों की ताकत की जांच करेगा। दौड़ने, तेजी से गति पकड़ने और दिशा बदलने में इन मांसपेशियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इससे मांसपेशियों की असमान ताकत की पहचान करने और ताकत बढ़ाने या चोट से उबरने के लिए विशेष कार्यक्रम तैयार करने में मदद मिलेगी।
इनर्शियल मेजरमेंट यूनिट्स (आईएमयू): ये गति मापने वाले सेंसर हैं, जो त्वरण, शरीर की दिशा और गतिविधियों के पैटर्न का विश्लेषण करने में मदद करेंगे। खिलाड़ियों के शरीर या उसके अलग-अलग हिस्सों पर लगाए जाने वाले ये सेंसर दौड़ने की तकनीक, छलांग और दिशा बदलने जैसी गतिविधियों की जानकारी दे सकते हैं।
इलेक्ट्रोमायोग्राफी (ईएमजी): यह तकनीक मांसपेशियों में पैदा होने वाली विद्युत गतिविधियों को रिकॉर्ड करती है। इससे खेल विशेषज्ञ यह समझ सकेंगे कि किसी खास गतिविधि के दौरान कौन-सी मांसपेशियां सक्रिय होती हैं और व्यायाम के दौरान उनकी सक्रियता में किस तरह बदलाव आता है।
टाइमिंग गेट्स: सेंसर आधारित यह प्रणाली निर्धारित स्थानों से गुजरने में लगे समय को रिकॉर्ड करके खिलाड़ियों की दौड़ने की गति और त्वरण मापेगी। इसका इस्तेमाल 10, 20 और 30 मीटर जैसी दूरियों पर प्रदर्शन का आकलन करने के लिए किया जा सकेगा।
वैज्ञानिक आंकड़ों से खिलाड़ियों के लिए तैयार होगा विशेष प्रशिक्षण
वियरेबल उपकरणों और बायोमैकेनिक्स तकनीक के संयुक्त इस्तेमाल से कोच खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति को अधिक विस्तार से समझ सकेंगे। इनसे मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर प्रदर्शन की कमजोरियों की पहचान करने, व्यक्तिगत प्रशिक्षण कार्यक्रम बनाने और ताकत, गति तथा शरीर की गतिविधियों में सुधार की निगरानी करने में मदद मिल सकती है।
यह तकनीक चोट से उबर रहे खिलाड़ियों के पुनर्वास में भी उपयोगी हो सकती है। फिजियोथेरेपिस्ट और खेल विशेषज्ञ खिलाड़ियों की शारीरिक प्रगति पर नजर रख सकेंगे और यह आकलन कर सकेंगे कि वे दोबारा प्रतिस्पर्धी प्रशिक्षण शुरू करने के लिए कितने तैयार हैं।
हालांकि, इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए प्रशिक्षित खेल वैज्ञानिकों, फिजियोथेरेपिस्ट और तकनीकी विशेषज्ञों की जरूरत होगी, जो आंकड़ों का सही विश्लेषण करके उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण योजनाओं में बदल सकें।
अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए खिलाड़ियों को तैयार करने पर जोर
यह प्रस्ताव पंजाब में खिलाड़ियों के विकास और प्रतियोगिताओं की तैयारी में खेल विज्ञान को शामिल करने की दिशा में एक पहल है। वैज्ञानिक आकलन से कोच प्रशिक्षण की तीव्रता, शारीरिक क्षमता और रिकवरी से जुड़े फैसले अधिक सटीक तरीके से ले सकेंगे।
इस योजना का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि उपकरणों को अलग-अलग खेलों में किस तरह उपलब्ध कराया जाता है, उनका प्रभावी इस्तेमाल कितना होता है और तकनीकी सहायता के लिए कितने प्रशिक्षित विशेषज्ञ तैयार किए जाते हैं।
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