मल्टीस्पेक्ट्रल ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन और स्पेक्ट्रोरैडियोमीटर से फसल निगरानी, मैपिंग और सटीक खेती (प्रिसिजन फार्मिंग) को मिलेगी मजबूती
मल्टीस्पेक्ट्रल ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन और स्पेक्ट्रोरैडियोमीटर से फसल निगरानी, मैपिंग और सटीक खेती (प्रिसिजन फार्मिंग) को मिलेगी मजबूती
खबर खास | लुधियाना
अमनप्रीत कौर बाजवा
पंजाब तकनीक-संचालित कृषि अनुसंधान की ओर बढ़ रहा है। पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (PAU) फसल निगरानी, खेत के आकलन और वैज्ञानिक शोध में सुधार के लिए मल्टीस्पेक्ट्रल सर्वे और मैपिंग ड्रोन सहित आधुनिक उपकरण खरीदने की योजना बना रही है।
प्रस्तावित खरीदारी में ₹15 लाख की अनुमानित लागत वाला एक मल्टीस्पेक्ट्रल ड्रोन, ₹9.20 लाख का एक इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन और ₹65 लाख का एक फील्ड-पोर्टेबल UV/VIS/NIR स्पेक्ट्रोरैडियोमीटर शामिल है। इन तीनों उपकरणों की कुल अनुमानित लागत ₹89.20 लाख है।
इन उपकरणों से एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग, भूमि सर्वेक्षण, फसल आकलन तथा पौधों और मिट्टी की विशेषताओं के अध्ययन में शोध को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
मल्टीस्पेक्ट्रल ड्रोन तकनीक से कैसे मिलेगी मदद?
पारंपरिक कैमरों के विपरीत, जो मुख्य रूप से दिखाई देने वाले प्रकाश (विजिबल लाइट) को कैप्चर करते हैं, मल्टीस्पेक्ट्रल कैमरे अलग-अलग वेवलेंथ बैंड में जानकारी रिकॉर्ड करते हैं। शोधकर्ता इस डेटा का विश्लेषण करके फसलों की सेहत, पौधों की वृद्धि और खेतों में आने वाले बदलावों का सटीक आकलन कर सकते हैं।
यह तकनीक फसल में तनाव (स्ट्रैस), असमान वृद्धि या पानी और पोषक तत्वों की कमी से जुड़ी संभावित समस्याओं के संकेतों की पहचान करने में मदद कर सकती है। इससे शोधकर्ता केवल भौतिक निरीक्षण पर निर्भर रहने के बजाय डिजिटल और स्थानिक (स्पेशियल) डेटा के जरिए खेतों की स्थिति का आकलन कर सकेंगे।
सटीक मैपिंग के लिए ड्रोन आधारित तकनीक
मल्टीस्पेक्ट्रल सर्वे ड्रोन भौगोलिक निर्देशांकों (जिओग्राफिकल कोऑर्डिनेट्स) से जुड़ी हवाई तस्वीरें कैप्चर कर सकता है। इन तस्वीरों को बाद में डिजिटल नक्शों में प्रोसेस किया जा सकता है, जिससे शोधकर्ताओं को कृषि भूमि के अलग-अलग हिस्सों का अध्ययन करने में मदद मिलती है।
बार-बार किए जाने वाले सर्वे से समय के साथ फसलों की स्थिति में होने वाले बदलावों को ट्रैक करने में मदद मिलेगी, जिससे फसल विकास, सिंचाई योजना और प्रिसिजन फार्मिंग से जुड़े शोध को समर्थन मिलेगा।
सटीक भूमि सर्वेक्षण के लिए इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन
इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन एक आधुनिक सर्वेक्षण उपकरण है जिसका उपयोग दूरी, क्षैतिज (हॉरिजॉन्टल) और लंबवत (वर्टिकल) कोण और भौगोलिक निर्देशांक मापने के लिए किया जाता है।
यह सटीक भूमि सर्वेक्षण, फील्ड मैपिंग और स्थलाकृतिक (टोपोग्राफिक) माप में मदद कर सकता है। कृषि इंजीनियरिंग में इसका उपयोग भूमि समतलीकरण (लैंड लेवलिंग), सिंचाई योजना और जल निकासी (ड्रैनेज) से जुड़े अध्ययनों में किया जा सकता है।
पौधों और मिट्टी के अध्ययन के लिए स्पेक्ट्रोरैडियोमीटर
फील्ड-पोर्टेबल UV/VIS/NIR स्पेक्ट्रोरैडियोमीटर शोधकर्ताओं को विभिन्न वेवलेंथ रेंज में परावर्तित प्रकाश (रिफ्लेक्टेड लाइट) को मापने में मदद करेगा।
इस उपकरण का उपयोग यह अध्ययन करने के लिए किया जा सकता है कि पौधे, मिट्टी और अन्य सामग्रियां प्रकाश के साथ कैसे प्रतिक्रिया करती हैं, जिससे वनस्पति की विशेषताओं, फसल की स्थिति और कृषि उत्पादकता को प्रभावित करने वाले पर्यावरणीय कारकों के बारे में बहुमूल्य जानकारी मिलती है।
क्या तकनीक से खेती की लागत कम करने में मदद मिल सकती है?
प्रिसिजन फार्मिंग तकनीक फसल की स्थितियों में भिन्नता की पहचान करने में मदद करती है, जिससे सिंचाई, उर्वरक (खाद) के छिड़काव और फसल सुरक्षा के संबंध में अधिक सटीक निर्णय लिए जा सकते हैं।
जब मिट्टी के परीक्षण, मौसम की जानकारी और अन्य कृषि डेटा को इस तकनीक के साथ मिलाया जाता है, तो इससे खेती के संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, पीएयू की यह पहल मुख्य रूप से वैज्ञानिक अनुसंधान और सर्वेक्षण के उद्देश्य से है। इसका मतलब यह नहीं है कि किसानों के लिए तुरंत राज्यव्यापी ड्रोन सेवा शुरू की जा रही है।
सर्वे ड्रोन और स्प्रे ड्रोन में अंतर
मल्टीस्पेक्ट्रल सर्वे ड्रोन मुख्य रूप से कृषि डेटा एकत्र करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, जबकि स्प्रे ड्रोन का उपयोग निर्दिष्ट क्षेत्रों में फसल-सुरक्षा रसायनों और अन्य स्वीकृत खादों के छिड़काव के लिए किया जाता है।
उपयुक्त सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने पर स्प्रे ड्रोन से कृषि कार्यों में लगने वाला समय कम होता है और रसायनों के सीधे संपर्क में आने का जोखिम भी घटता है।
इसी तरह, बेलर और स्ट्रॉ-मैनेजमेंट मशीनों सहित यंत्रीकृत अवशेष-प्रबंधन उपकरण पराली प्रबंधन में मदद कर सकते हैं। डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम कृषि मशीनों और पराली प्रबंधन के संचालन की ट्रैकिंग को और बेहतर बना सकते हैं।
खबर की 5 मुख्य बातें
पीएयू की ₹15 लाख की अनुमानित लागत से मल्टीस्पेक्ट्रल सर्वे और मैपिंग ड्रोन खरीदने की योजना है।
₹9.20 लाख की लागत वाला इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन सटीक भूमि सर्वेक्षण में मदद करेगा।
₹65 लाख का फील्ड-पोर्टेबल स्पेक्ट्रोरैडियोमीटर पौधों और मिट्टी की विशेषताओं के अध्ययन में सहायक होगा।
इन तीनों उपकरणों की कुल अनुमानित लागत ₹89.20 लाख है।
इस पहल से कृषि अनुसंधान को मजबूती मिलने और प्रिसिजन-फार्मिंग तकनीकों के विकास में मदद मिलने की उम्मीद है।
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