मानसून सत्र के दूसरे दिन E-20 नीति को लेकर सदन में गरमाई बहस, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा—बिना राज्यों से सलाह लिए लागू किया जा रहा फैसला
मानसून सत्र के दूसरे दिन E-20 नीति को लेकर सदन में गरमाई बहस, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा—बिना राज्यों से सलाह लिए लागू किया जा रहा फैसला
पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E-20) के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। राज्य सरकार ने केंद्र की इस नीति पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि इसे लागू करने से पहले राज्यों, विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से राय ली जानी चाहिए थी। विधानसभा ने प्रस्ताव की प्रति राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और नीति आयोग के उपाध्यक्ष को भेजने का फैसला भी किया।
सदन में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि E-20 नीति को तय समय से पहले लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसे वर्ष 2030 से लागू किया जाना था, लेकिन अब इसे 2026 में ही लागू करने की तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के कारण लोगों के वाहनों में खराबी आ रही है और आम उपभोक्ताओं को इसका नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाते हुए तीखी राजनीतिक टिप्पणी की।
विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि E-20 का विषय केवल पंजाब ही नहीं बल्कि पूरे देश के लोगों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि इस नीति को लेकर देशभर में लोगों की आवाज केंद्र सरकार तक पहुंचाई जानी चाहिए और इस पर दोबारा विचार किया जाना आवश्यक है।
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने निंदा प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ने से वाहनों की माइलेज कम हो रही है और कई वाहनों में तकनीकी समस्याएं सामने आ रही हैं। उनका कहना था कि इस नीति के प्रभाव का विस्तृत अध्ययन किए बिना इसे लागू करना उचित नहीं होगा।
कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंध ने कहा कि पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण की गुणवत्ता और उसके प्रभाव की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों की राय के आधार पर ही आगे की नीति तय होनी चाहिए ताकि वाहन मालिकों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
वहीं, कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखते हुए कहा कि सरकार को लोगों के सामने विकल्प उपलब्ध कराने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि पेट्रोल पंपों पर सामान्य पेट्रोल और E-20 दोनों उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वाहन मालिक अपनी जरूरत और वाहन की क्षमता के अनुसार ईंधन का चयन कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि E-20 के कुछ सकारात्मक पहलू हैं तो उन पर भी खुलकर चर्चा होनी चाहिए और आम लोगों को राहत देने के लिए वैट में कमी जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जाना चाहिए।
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