अपने संबोधन में राज्यपाल ने साहित्य की समाज निर्माण में महत्ता पर बल देते हुए युवाओं को गुणवत्तापूर्ण साहित्य सृजन के लिए प्रेरित किया
अपने संबोधन में राज्यपाल ने साहित्य की समाज निर्माण में महत्ता पर बल देते हुए युवाओं को गुणवत्तापूर्ण साहित्य सृजन के लिए प्रेरित किया
खबर खास, बठिंडा :
पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू पंजाब) में आयोजित दो दिवसीय चौथे वार्षिक अंग्रेज़ी साहित्यिक महोत्सव 2026 का उद्घाटन किया तथा उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। यह महोत्सव अंग्रेज़ी विभाग द्वारा गुरु काशी विश्वविद्यालय, महाराजा रणजीत सिंह पंजाब तकनीकी विश्वविद्यालय और बाबा फरीद ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न संस्थानों के विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने भाग लिया।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने वर्ष 2009 में स्थापना के बाद सीयू पंजाब की उल्लेखनीय प्रगति की सराहना करते हुए इसकी 17 वर्षों की यात्रा को प्रेरणादायक बताया। उन्होंने समाज निर्माण और युवा पीढ़ी को प्रेरित करने में साहित्य और शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे साहित्यिक उत्सव रचनात्मकता को बढ़ावा देते हैं और विचारों की अभिव्यक्ति एवं संवाद के लिए सशक्त मंच प्रदान करते हैं।
साहित्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि साहित्य न केवल समाज का दर्पण है, बल्कि उसे दिशा भी देता है। भारतीय साहित्यिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वाल्मीकि रामायण जैसे ग्रंथों ने समाज को आदर्शों और मूल्यों की समझ प्रदान की है। कवियों और लेखकों ने समय-समय पर युवाओं को जागरूक किया और उन्हें भविष्य के लिए मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि गुरुओं की शिक्षाओं और आर्यभट्ट जैसे महान विद्वानों की विरासत से समृद्ध भारत की सभ्यतागत धरोहर आज भी प्रगति के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने युवाओं से गुणवत्तापूर्ण साहित्य सृजन में योगदान देने का आह्वान करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे आयोजन रचनात्मकता, सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करेंगे।
कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी ने राज्यपाल के मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल द्वारा समकालीन चुनौतियों पर दिए गए विचार जागरूकता उत्पन्न करते हैं और समाधान की दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत कौशल विकास पर केंद्रित इस आयोजन के लिए अंग्रेज़ी विभाग की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में सहयोग, पारस्परिक सम्मान और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करते हैं।
उद्घाटन सत्र के दौरान विशिष्ट अतिथि के रूप में बाबा फरीद ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन प्रो. गुरमीत सिंह धालीवाल तथा एमआरएसपीटीयू के कुलसचिव डॉ. गुरिंदर पाल सिंह बराड़ द्वारा पंजाब केन्द्रीय विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा तैयार विशेष पत्रिका का विमोचन किया गया।
इस अवसर पर सम कुलपति प्रो. किरण हजारिका ने राज्यपाल एवं अतिथियों का धन्यवाद करते हुए भारतीय आध्यात्मिक साहित्य की समरसता, शांति और सतत विकास के मूल्यों को स्थापित करने में भूमिका पर प्रकाश डाला तथा प्रतिभागियों को फेस्ट की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की शुरुआत अंग्रेज़ी विभाग के अध्यक्ष प्रो. विपन पाल सिंह द्वारा स्वागत संबोधन एवं मुख्य अतिथि के परिचय से हुई, जबकि समापन धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम समन्वयक डॉ. दिनेश बाबू पी. तथा प्रो. शाहिला ज़फर द्वारा किया गया।
साहित्यिक मेले के प्रथम दिवस के दौरान विभिन्न संवादात्मक सत्रों का आयोजन भी किया गया, जिनमें विशिष्ट वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए। यह मेला विद्यार्थियों में साहित्यिक रचनात्मकता, आलोचनात्मक चिंतन और सहयोगात्मक अधिगम को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ विद्वानों और प्रतिभागियों के बीच संवाद का सशक्त मंच प्रदान करता है।
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