मिशन ओलंपिक सेल का बड़ा फैसला—स्विट्जरलैंड और इटली में ट्रेनिंग से भारतीय एथलीट्स की पदक उम्मीदें होंगी और मजबूत
मिशन ओलंपिक सेल का बड़ा फैसला—स्विट्जरलैंड और इटली में ट्रेनिंग से भारतीय एथलीट्स की पदक उम्मीदें होंगी और मजबूत
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नई दिल्ली: आने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स को ध्यान में रखते हुए भारत के स्टार एथलीट्स की तैयारियों को बड़ा बढ़ावा मिला है। मिशन ओलंपिक सेल (MOC) ने दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा और दिग्गज निशानेबाज मनु भाकर के लिए विदेशी प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मंजूरी दे दी है। यह फैसला खिलाड़ियों की फॉर्म और फिटनेस को चरम पर पहुंचाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
MOC की 173वीं बैठक में लिए गए इस फैसले के तहत नीरज चोपड़ा 25 मई से 10 जुलाई तक स्विट्जरलैंड के बिएन स्थित ओलंपिक ट्रेनिंग सेंटर में 47 दिनों का विशेष ट्रेनिंग कैंप करेंगे। फिलहाल वह तुर्किये में अपनी पीठ की चोट से उबर रहे हैं और यह कैंप उनकी वापसी को मजबूती देगा। नीरज के साथ उनके कोच जय चौधरी और फिजियोथेरेपिस्ट ईशान मरवाहा भी रहेंगे।
नीरज चोपड़ा का रिकॉर्ड इन दोनों बड़े टूर्नामेंट्स में शानदार रहा है। उन्होंने 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था, वहीं एशियन गेम्स 2018 और 2022 में लगातार स्वर्ण पदक हासिल कर इतिहास रचा। ऐसे में इस बार भी उनसे गोल्ड की उम्मीदें काफी ज्यादा हैं।
वहीं, पेरिस 2024 ओलंपिक की डबल मेडलिस्ट मनु भाकर को इटली के लुक्का में 13 से 22 मई तक ट्रेनिंग की मंजूरी मिली है। उनके साथ कोच जसपाल राणा और फिजियोथेरेपिस्ट स्नेहिल खुराना रहेंगे। मनु 10 मीटर एयर पिस्टल और 25 मीटर पिस्टल इवेंट्स में भारत की सबसे मजबूत दावेदारों में गिनी जा रही हैं।
इसके अलावा, लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह को भी अमेरिका में 15 मई से 17 जून तक ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं में भाग लेने की अनुमति दी गई है। एशियन गेम्स 2022 के ब्रॉन्ज मेडलिस्ट गुलवीर लॉस एंजेलिस और नैशविल जैसी जगहों पर शीर्ष स्तर की रेस में हिस्सा लेकर अनुभव हासिल करेंगे।
सरकार की टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स) के तहत इन खिलाड़ियों के यात्रा, आवास, ट्रेनिंग, मेडिकल और अन्य खर्चों को कवर किया जाएगा। यह कदम दर्शाता है कि भारत अब अपने एथलीट्स को विश्वस्तरीय सुविधाएं देने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा।
आने वाले महीनों में ग्लासगो में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स (23 जुलाई–2 अगस्त) और जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स (19 सितंबर–4 अक्टूबर) में भारत की नजरें एक बार फिर पदकों पर टिकी हैं। इन विदेशी प्रशिक्षण कार्यक्रमों से खिलाड़ियों की तैयारियों को नई धार मिलने की उम्मीद है।
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