विशेषज्ञों ने मुफ्त बिजली, मुआवजा योजनाओं और फसल विविधीकरण को बताया सुधार का कारण
विशेषज्ञों ने मुफ्त बिजली, मुआवजा योजनाओं और फसल विविधीकरण को बताया सुधार का कारण
खबर खास | चंडीगढ़
कृषि संकट और बढ़ते किसान कर्ज को लेकर लंबे समय से चर्चा में रहने वाले पंजाब के लिए नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताजा रिपोर्ट कुछ राहत भरी खबर लेकर आई है।
‘क्राइम इन इंडिया-2024’ रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में किसान और कृषि मजदूर आत्महत्या के मामलों की संख्या पिछले दस वर्षों में सबसे कम दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों को दी जा रही आर्थिक सहायता, मुफ्त बिजली, राहत योजनाएं और फसल विविधीकरण की दिशा में किए गए प्रयास अब जमीन पर असर दिखाने लगे हैं।
एनसीआरबी रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 के दौरान पंजाब में कुल 127 किसानों और कृषि मजदूरों ने आत्महत्या की। इनमें 57 किसान और 70 कृषि मजदूर शामिल हैं। इसके मुकाबले वर्ष 2023 में यह संख्या 161 थी, यानी एक साल में करीब 21 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वर्ष 2015 के बाद से पंजाब में यह सबसे कम आंकड़ा है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में किसानों को राहत देने के लिए कई कदम उठाए हैं। किसानों को मुफ्त बिजली, फसल नुकसान पर मुआवजा, कर्ज राहत योजनाएं और गेहूं-धान के पारंपरिक चक्र से बाहर निकलने के लिए प्रोत्साहन जैसी योजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर आर्थिक दबाव कम करने में मददगार साबित हो रही हैं।
हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि स्थिति को अभी पूरी तरह सामान्य नहीं माना जा सकता। कृषि मजदूरों में आत्महत्या के मामले अब भी अपेक्षाकृत अधिक हैं, जो ग्रामीण आर्थिक ढांचे की कमजोरियों को दर्शाते हैं। छोटे और सीमांत किसान अब भी बढ़ती खेती लागत, कर्ज के बोझ और घटती आय जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कृषि से जुड़े आत्महत्या मामलों में कमी लाने के मामले में पंजाब ने देश के कई अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है।
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