छोटी दिवाली पर चंडीगढ़ का AQI 72 रहने का दिया हवाला; कांग्रेस सांसद ने पंजाब के किसानों को जिम्मेदार ठहराने पर उठाए सवाल, केंद्र व दिल्ली सरकार से जवाबदेही की मांग
छोटी दिवाली पर चंडीगढ़ का AQI 72 रहने का दिया हवाला; कांग्रेस सांसद ने पंजाब के किसानों को जिम्मेदार ठहराने पर उठाए सवाल, केंद्र व दिल्ली सरकार से जवाबदेही की मांग
खबर खास | चंडीगढ़
चंडीगढ़ से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने दिल्ली के बिगड़ते वायु प्रदूषण के लिए पंजाब के किसानों को बार-बार जिम्मेदार ठहराने की कोशिशों पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हर साल हमारे किसानों को बलि का बकरा नहीं बनाया जा सकता।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट शेयर करते हुए तिवारी ने चंडीगढ़ के एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) का हवाला दिया और उस तर्क को खारिज किया जिसमें पंजाब में पराली जलाने को दिल्ली के जहरीले धुएं की मुख्य वजह बताया जाता है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र और दिल्ली सरकार से अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने और इस गंभीर संकट का स्थायी समाधान खोजने का आग्रह किया।
पंजाब और हरियाणा के बीच होकर भी चंडीगढ़ की हवा साफ कैसे?
मनीष तिवारी ने ध्यान दिलाया कि चंडीगढ़ भौगोलिक रूप से पंजाब और हरियाणा के बिल्कुल बीच स्थित है, फिर भी छोटी दिवाली पर यहां का AQI महज 72 दर्ज किया गया। दिल्ली के प्रदूषण के लिए पंजाब की पराली को दोषी ठहराने के तर्क पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि अगर पराली का धुआं पंजाब से दिल्ली की ओर जा रहा है, तो चंडीगढ़ की हवा इतनी साफ कैसे रह सकती है?
प्रदूषण की चर्चाओं में अक्सर उत्तर-पश्चिमी हवाओं की भूमिका का जिक्र किए जाने पर तंज कसते हुए कांग्रेस सांसद ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि अब किसी को यह समझाने की जरूरत नहीं है कि पराली का धुआं चंडीगढ़ को पूरी तरह बाईपास करके सीधा दिल्ली कैसे पहुंच जाता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित सरकारों की जवाबदेही को नजरअंदाज करके दिल्ली के पूरे प्रदूषण का ठीकरा पंजाब के किसानों पर फोड़ना बिल्कुल गलत है।
85 फीसदी कटाई के बाद भी दिल्ली में स्वास्थ्य आपातकाल क्यों?
तिवारी ने बताया कि अक्टूबर 2026 के अंत तक पंजाब में धान की लगभग 85 प्रतिशत कटाई पूरी हो चुकी थी। उन्होंने नवंबर और दिसंबर के दौरान दिल्ली की हवा का लगातार जहरीला होना एक बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट करार दिया।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि दिल्ली पिछले एक दशक से भी अधिक समय से हर साल गंभीर वायु प्रदूषण की समस्या से जूझ रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस बार-बार आने वाले संकट के बावजूद आज तक कोई स्थायी समाधान क्यों नहीं तलाशा गया? उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्र और दिल्ली सरकार को अपनी नैतिक जिम्मेदारी माननी चाहिए और ठोस कदम उठाने चाहिए, न कि पंजाब के किसान समुदाय पर दोष मढ़कर अपनी जिम्मेदारियों से बचना चाहिए।
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