‘अगर खतरा नहीं था तो पहले सुरक्षा क्यों दी गई?’ — राघव चड्ढा के मुद्दे पर रंधावा ने सरकार को घेरा कहा, जनता के टैक्स के पैसे से राजनीतिक स्टंट कर रही है ‘आप’ सरकार
‘अगर खतरा नहीं था तो पहले सुरक्षा क्यों दी गई?’ — राघव चड्ढा के मुद्दे पर रंधावा ने सरकार को घेरा कहा, जनता के टैक्स के पैसे से राजनीतिक स्टंट कर रही है ‘आप’ सरकार
खबर खास, चंडीगढ़ :
पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं गुरदासपुर से लोकसभा सदस्य सुखजिंदर सिंह रंधावा ने राघव चड्ढा की सुरक्षा वापस लेने के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सुरक्षा कभी भी राजनीतिक हथियार नहीं बननी चाहिए और सुरक्षा घटाने या वापस लेने के अचानक फैसले गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
रंधावा ने सवाल उठाया कि क्या ये फैसले वास्तविक खतरे के आकलन (थ्रेट परसेप्शन) पर आधारित हैं या आंतरिक पार्टी समीकरणों का परिणाम हैं? उन्होंने कहा, “जनता की सुरक्षा को राजनीतिक सुविधा का साधन नहीं बनाया जा सकता। इस मामले में पारदर्शिता बेहद जरूरी है और डीजीपी पंजाब को स्पष्ट करना चाहिए कि इस फैसले के पीछे क्या कारण हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि जब वे गृह मंत्री के पद पर थे, तब ऐसे मामलों में निर्णय पूरी तरह खुफिया इनपुट और सीआईडी रिपोर्ट्स के आधार पर लिए जाते थे। ऐसे संवेदनशील फैसलों में संस्थागत प्रक्रिया और सुरक्षा एजेंसियों की सिफारिशों का पालन अनिवार्य होता है।
पूर्व गृह मंत्री ने सरकार की कार्यप्रणाली पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि अब कोई खतरा नहीं है, तो पहले इतनी बड़ी सुरक्षा क्यों दी गई थी? और यदि पहले खतरा था, तो अब ऐसा क्या बदल गया है कि सुरक्षा वापस ले ली गई? उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनता के टैक्स का पैसा राजनीतिक स्टंट या निजी हितों के लिए खर्च नहीं होना चाहिए।
रंधावा ने आगे कहा कि सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति करना राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए घातक साबित हो सकता है। उन्होंने मांग की कि सुरक्षा देने या वापस लेने की प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि संवैधानिक संस्थाओं और प्रशासन पर जनता का भरोसा बना रहे।
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