पुलिस का कहना—टाइमर या रिमोट कंट्रोल से किए गए हो सकते हैं हमले; दोनों घटनाओं में अभी तक सीधा संबंध साबित नहीं
पुलिस का कहना—टाइमर या रिमोट कंट्रोल से किए गए हो सकते हैं हमले; दोनों घटनाओं में अभी तक सीधा संबंध साबित नहीं
ख़बर ख़ास | अमृतसर
पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव ने बुधवार को जालंधर और अमृतसर में हुए हालिया धमाकों को लेकर अहम जानकारी साझा की। उन्होंने पुष्टि की कि दोनों घटनाओं में इम्प्रोवाइज़्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) का इस्तेमाल किया गया था।
अमृतसर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए डीजीपी ने बताया कि शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि इन धमाकों को टाइमर या रिमोट कंट्रोल मैकेनिज्म के जरिए अंजाम दिया गया हो सकता है। उन्होंने कहा कि एजेंसियां तकनीकी पहलुओं की गहराई से जांच कर रही हैं, ताकि हमले के सटीक तरीके का पता लगाया जा सके।
डीजीपी यादव ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के संभावित लिंक की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं पंजाब में शांति भंग करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे एक बड़े प्रॉक्सी वॉर का हिस्सा हो सकती हैं। उनके अनुसार, सीमा पार से राज्य को अस्थिर करने की कोशिशें की जा रही हैं।
KLA के दावे पर संदेह
जिम्मेदारी को लेकर किए गए दावों पर डीजीपी ने संदेह जताया। उन्होंने कहा कि तथाकथित “खालिस्तान लिबरेशन आर्मी (KLA)” नाम के किसी संगठन के अस्तित्व का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। ऐसे नाम अक्सर सोशल मीडिया पर भ्रम और गलत जानकारी फैलाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।
दोनों धमाकों के बीच अभी तक कोई सीधा लिंक नहीं
पुलिस ने अभी तक जालंधर और अमृतसर धमाकों के बीच कोई सीधा संबंध स्थापित नहीं किया है। जांच एजेंसियां संदिग्धों के नेटवर्क और उनकी गतिविधियों का पता लगाने के लिए विभिन्न पहलुओं पर काम कर रही हैं, ताकि पूरे षड्यंत्र का खुलासा किया जा सके।
पंजाब को “फ्रंटलाइन स्टेट” बताते हुए डीजीपी ने कहा कि इस तरह के खतरे और इनपुट समय-समय पर मिलते रहते हैं। हालांकि, उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और शांति भंग करने की किसी भी कोशिश के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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