अपने उद्बोधन में प्रो. अग्निहोत्री ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के असंख्य गुमनाम सेनानियों की स्मृति को जीवित रखना केवल इतिहास लेखन का उत्तरदायित्व नहीं, बल्कि यह भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और चेतना का स्रोत भी है।