PM मोदी और हरियाणा के CM नायब सिंह सैनी से मुलाकात के बाद पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले BJP-शिरोमणि अकाली दल के संभावित गठजोड़ को लेकर सियासी चर्चाएं तेज
PM मोदी और हरियाणा के CM नायब सिंह सैनी से मुलाकात के बाद पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले BJP-शिरोमणि अकाली दल के संभावित गठजोड़ को लेकर सियासी चर्चाएं तेज
खबर खास | चंडीगढ़
पंजाब विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच संभावित गठबंधन को लेकर नई सियासी अटकलें सामने आई हैं।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, पंजाब की राजनीति में एक महत्वपूर्ण ताकत बने रहने के लिए अकाली दल को BJP के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। वहीं, BJP कथित तौर पर परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक जैसे मुद्दों पर अकाली दल का समर्थन चाहती है।
यह चर्चा उस समय और तेज हो गई जब हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और SAD अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के बीच मुलाकात हुई। सूत्रों का दावा है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस मुलाकात को संभव बनाने में अहम भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री मोदी से दिल्ली में मुलाकात से पहले सुखबीर बादल ने कथित तौर पर चंडीगढ़ स्थित हरियाणा के मुख्यमंत्री आवास पर CM नायब सिंह सैनी से मुलाकात की थी।
दिल्ली से लौटने के बाद सुखबीर बादल शनिवार को चंडीगढ़ पहुंचे और उन्होंने अकाली दल की कोर कमेटी की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में हरसिमरत कौर बादल, डॉ. दलजीत सिंह चीमा, महेशिंदर सिंह ग्रेवाल, बलविंदर सिंह भुंडड़, गुलजार सिंह रणीके, सिकंदर सिंह मलूका और हीरा सिंह गाबड़िया समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
SAD प्रवक्ता अर्शदीप सिंह कलेर ने कहा कि बैठक में पंजाब की मौजूदा राजनीतिक और प्रशासनिक स्थिति पर चर्चा हुई और गठबंधन को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई। सुखबीर बादल ने भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात पंजाब की मौजूदा परिस्थितियों पर केंद्रित थी।
इस बीच डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने बताया कि पार्टी के संसदीय बोर्ड में महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिरोमणि अकाली दल सैद्धांतिक रूप से परिसीमन का समर्थन करता है, लेकिन केवल जनसंख्या को आधार बनाकर विधानसभा क्षेत्रों के पुनर्गठन का विरोध करता है।
अकाली दल ने इसके बजाय ऐसा फॉर्मूला सुझाया है, जिसके तहत विधानसभा सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत तक वृद्धि की जा सकती है।
हालांकि BJP और अकाली दल दोनों ने आधिकारिक तौर पर किसी चुनावी गठबंधन पर बातचीत से इनकार किया है, लेकिन एक के बाद एक हुई इन हाई-प्रोफाइल राजनीतिक बैठकों ने पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले संभावित सियासी पुनर्गठन की अटकलों को जरूर हवा दे दी है।
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