राष्ट्रपति पदकों से पंजाब पुलिस की उत्कृष्ट सेवाओं को सम्मान, पंजाबी साहित्य, कला और संस्कृति को वैश्विक मंच देने की तैयारी
राष्ट्रपति पदकों से पंजाब पुलिस की उत्कृष्ट सेवाओं को सम्मान, पंजाबी साहित्य, कला और संस्कृति को वैश्विक मंच देने की तैयारी
खबर खास | चंडीगढ़/नई दिल्ली
पंजाब पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों की उत्कृष्ट सेवाओं को स्वतंत्रता दिवस से पहले राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। केंद्रीय गृह मंत्रालय, भारत सरकार ने 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर पंजाब पुलिस के उन अधिकारियों और कर्मचारियों के नामों की घोषणा की है, जिन्हें विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक (PSM) और सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक (MSM) से सम्मानित किया जाएगा।
CIA बरनाला के प्रभारी इंस्पेक्टर बलजीत सिंह को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक प्रदान किया जाएगा। उनकी समर्पित सेवा, पेशेवर दक्षता और पुलिसिंग में उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए उन्हें इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चुना गया है।
इसी तरह, दो IPS अधिकारियों—IGP इंटेलिजेंस (एडमिन) बाबू लाल मीणा और IGP प्रोविजनिंग डॉ. एस. भूपति—सहित छह PPS अधिकारियों को सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक के लिए चुना गया है।
इन अधिकारियों में SP PBI संगरूर नवरीत सिंह विर्क, DSP हेडक्वार्टर संगरूर करनैल सिंह, DSP सिक्योरिटी सुभाष चंद, DSP CID यूनिट अमृतसर संजीव कुमार, ACP नॉर्थ अमृतसर गगनदीप सिंह और DSP जहान खेलां जसवीर सिंह शामिल हैं। इनके अलावा इंस्पेक्टर रशपाल सिंह, इंस्पेक्टर निर्मल सिंह और ASI निर्मल सिंह भी पदक पाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों में शामिल हैं।
पंजाब के DGP गौरव यादव ने सभी पदक विजेताओं को बधाई देते हुए केंद्र और पंजाब सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इन अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलना पूरी पंजाब पुलिस के लिए गर्व की बात है।
DGP ने कहा कि ये सम्मान अधिकारियों की निष्ठा, पेशेवर क्षमता, अनुशासन और उत्कृष्ट सेवा की पहचान हैं। उन्होंने कहा कि पदक पाने वाले पुलिसकर्मियों की उपलब्धि पंजाब पुलिस परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए प्रेरणा है और इससे पुलिस बल को भविष्य में भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ जनता की सेवा करने का उत्साह मिलेगा।
उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मान पुलिस बल का मनोबल बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पंजाब जैसे सीमावर्ती राज्य में सुरक्षा से जुड़ी कई चुनौतियां हैं, इसलिए पुलिस कर्मचारियों का पूरी लगन और समर्पण के साथ काम करना बेहद जरूरी है।
इसी बीच, दिल्ली सरकार राजधानी में वर्ल्ड पंजाबी लिटरेरी फेस्टिवल आयोजित करने पर सक्रिय रूप से विचार कर रही है। दिल्ली के कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग के सचिव के. महेश ने शुक्रवार को ANI से बातचीत में इसकी जानकारी दी।
पार्टिशन हॉरर्स रिमेंबरेंस डे के मौके पर पार्टिशन म्यूजियम में बातचीत के दौरान महेश ने कहा कि सरकार पंजाबी साहित्य, कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए इस तरह के वैश्विक आयोजन की संभावना पर विचार कर रही है। उन्होंने बताया कि संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा और मनजिंदर सिंह सिरसा के साथ इस विषय पर चर्चा हो चुकी है और इसे आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा।
महेश ने कहा कि प्रस्तावित फेस्टिवल में आने वाले प्रतिनिधियों को पार्टिशन म्यूजियम का दौरा भी कराया जा सकता है, ताकि वे 1947 के विभाजन के दौरान पंजाब से विस्थापित हुए लोगों के संघर्ष, पीड़ा और असाधारण जज्बे को करीब से समझ सकें।
उन्होंने पार्टिशन म्यूजियम की स्थापना और इसके जरिए विभाजन की यादों को सुरक्षित रखने के लिए इसकी संस्थापक किश्वर देसाई के प्रयासों की भी सराहना की।
महेश ने कहा कि विभाजन के बाद पंजाब से बड़ी संख्या में लोग शरणार्थी के रूप में आए और उन्होंने मेहनत तथा संघर्ष के बल पर अपना जीवन दोबारा खड़ा किया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को इन लोगों की दृढ़ता और योगदान से सीखना चाहिए।
स्वतंत्रता दिवस समारोहों के बीच उन्होंने दिल्ली सरकार की कई सांस्कृतिक पहलों का भी उल्लेख किया, जिनमें हर घर तिरंगा अभियान, पार्टिशन हॉरर्स रिमेंबरेंस डे और हैंडलूम वीक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा के नेतृत्व में कला और संस्कृति से जुड़े कई नए प्रोजेक्ट आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
के. महेश ने कहा कि उनका विभाग संग्रहालयों के माध्यम से महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर भी विचार कर रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में इस दिशा में नई पहल शुरू की जा सकती है।
उन्होंने नई पीढ़ी, खासकर Gen Alpha और Gen Z से विभाजन तथा स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े इतिहास को समझने की अपील की। उन्होंने कहा कि विभाजन से प्रभावित लोग केवल पीड़ित नहीं थे, बल्कि उनमें से अनेक ने देश की आजादी के संघर्ष में भी योगदान दिया था।
कार्यक्रम में मौजूद पूर्व UN असिस्टेंट सेक्रेटरी-जनरल लक्ष्मी पुरी ने भी विभाजन की त्रासदी को याद रखने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इतिहास को याद रखना इसलिए जरूरी है ताकि ऐसी त्रासदियां दोबारा न हों और देश में सद्भाव तथा एकता मजबूत हो।
उन्होंने पार्टिशन म्यूजियम के प्रयासों की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि आने वाले समय में संग्रहालय आंदोलन एक व्यापक जन आंदोलन का रूप लेगा।
14 अगस्त को पार्टिशन हॉरर्स रिमेंबरेंस डे के रूप में मनाया जाता है। इस दिन 1947 के विभाजन के दौरान मारे गए लोगों, विस्थापित परिवारों और उनके संघर्ष एवं पीड़ा को याद किया जाता है।
शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विभाजन से प्रभावित लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनके जीवन संघर्ष मानव भावना की ताकत की याद दिलाते हैं। उन्होंने देश में सद्भाव और भाईचारा मजबूत करने तथा विकसित भारत के निर्माण के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।
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January 18, 2026
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