आप नेता ने कहा- अमरजीत सिंह चावला पर लगे आरोपों पर सभी राजनीतिक दलों को सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए
आप नेता ने कहा- अमरजीत सिंह चावला पर लगे आरोपों पर सभी राजनीतिक दलों को सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए
खबर खास | चंडीगढ़
आम आदमी पार्टी के पंजाब मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के नेतृत्व, वरिष्ठ अकाली नेताओं, कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अकाली नेता अमरजीत सिंह चावला और अन्य लोगों पर बहरीन की रहने वाली एक महिला की ओर से लगाए गए आरोपों को लेकर राजनीतिक दलों से सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष स्पष्ट करने की मांग की।
मंगलवार को प्रेस वार्ता के दौरान बलतेज पन्नू ने सवाल किया कि इस मामले पर अकाली दल का नेतृत्व सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया क्यों नहीं दे रहा है। उन्होंने विशेष रूप से सुखबीर सिंह बादल की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस मामले में सामने आकर अपनी स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं कर रहा।
महिला की शिकायत के बाद मामला दर्ज होने का दावा
बलतेज पन्नू ने कहा कि महिला की शिकायत के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई है और पिछले कई दिनों से यह मामला चर्चा में है। उन्होंने कहा कि अमरजीत सिंह चावला ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की सदस्यता सहित अन्य पदों से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या उनका इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया है।
पन्नू ने कहा कि चावला के खिलाफ आनंदपुर साहिब थाने में दुष्कर्म, गलत तरीके से बंधक बनाने और आपराधिक धमकी से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष से भी सवाल
आम आदमी पार्टी नेता ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी से भी सवाल किए। उन्होंने पूछा कि गंभीर आरोपों वाले ऐसे मामले में संगठन की ओर से अपेक्षित तत्परता क्यों नहीं दिखाई गई।
पन्नू ने कहा कि यदि गंभीर आरोपों का सामना कर रहे लोगों के बारे में सिख संगत को गुरुद्वारों के बाहर सूचना या नोटिस के माध्यम से जानकारी देना परंपरा का हिस्सा है, तो इस मामले में भी बिना देरी के ऐसी कार्रवाई की जानी चाहिए।
हरसिमरत बादल और अकाली नेताओं से भी जवाब मांगा
पन्नू ने पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल और अन्य अकाली नेताओं की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि शिकायतकर्ता महिला ने सुरक्षा और सहायता के लिए कई अकाली नेताओं से संपर्क किया था। पन्नू ने सवाल किया कि यदि महिला ने सुरक्षा की मांग की थी तो कथित तौर पर उसे सुरक्षा उपलब्ध कराने के बजाय कानूनी कार्रवाई करने की सलाह क्यों दी गई।
उन्होंने अकाली नेता विरसा सिंह वल्टोहा की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से अमरजीत सिंह चावला का बचाव किया। पन्नू ने यह भी सवाल किया कि बहरीन की रहने वाली महिला पंजाब कैसे पहुंची और वल्टोहा को उसके बारे में इतनी जानकारी कैसे थी।
युवा अकाली दल के अध्यक्ष सरबजीत सिंह झिंजर से सवाल करते हुए पन्नू ने कहा कि अकाली नेतृत्व को यह स्पष्ट करना चाहिए कि महिला पंजाब कैसे पहुंची और कथित तौर पर कई महीनों तक एक सराय में कैसे रही।
कांग्रेस नेताओं की चुप्पी पर भी निशाना
बलतेज पन्नू ने कांग्रेस नेताओं को भी निशाने पर लिया। उन्होंने विशेष रूप से सुखपाल सिंह खैरा का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि वह पंजाब सरकार के विभिन्न मुद्दों पर लगातार सवाल उठाते हैं, लेकिन इस मामले में उन्होंने अब तक कोई बयान क्यों नहीं दिया।
उन्होंने बिक्रम सिंह मजीठिया से भी सवाल किया कि जो नेता अक्सर सार्वजनिक मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हैं, उन्होंने इस मामले पर चुप्पी क्यों साध रखी है। पन्नू ने विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग से भी जवाब मांगा कि पंजाब में एक महिला से जुड़े कथित मामले को लेकर उन्होंने अब तक प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी।
भाजपा नेताओं से भी जवाब की मांग
आप नेता ने भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं सुनील जाखड़ और मनप्रीत सिंह बादल की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि विभिन्न सार्वजनिक मुद्दों पर सक्रिय रहने वाले भाजपा नेताओं ने इस मामले पर अब तक कोई बयान क्यों नहीं दिया।
पन्नू ने यह सवाल भी उठाया कि क्या अकाली दल और भाजपा के बीच किसी राजनीतिक समझ के कारण इस मामले पर चुप्पी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि बादल परिवार की चुप्पी को राजनीतिक नजरिए से देखा जा सकता है, लेकिन कांग्रेस और भाजपा जैसे विपक्षी दलों की ओर से इस मामले पर प्रतिक्रिया नहीं आना उनके लिए समझ से परे है।
राजनीतिक दलों से सार्वजनिक रुख स्पष्ट करने की मांग
बलतेज पन्नू ने कहा कि पंजाब और दुनिया भर में रहने वाले पंजाबी तथा सिख समुदाय के लोग इस मामले में राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रिया पर नजर रख रहे हैं और उनकी चुप्पी को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अकाली दल का नेतृत्व केवल चुप रहकर इस मुद्दे को नजरअंदाज नहीं कर सकता। पन्नू ने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से आरोपों को लेकर सार्वजनिक रूप से अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि किसी मामले पर चुप रहने से वह मामला समाप्त नहीं हो जाता।
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