7.50 लाख कर्मचारी-पेंशनर आंदोलन में शामिल, सरकारी दफ्तरों के बाहर धरना; गैर-आपात सेवाएं प्रभावित, CM मान ने बातचीत के लिए बुलाया
7.50 लाख कर्मचारी-पेंशनर आंदोलन में शामिल, सरकारी दफ्तरों के बाहर धरना; गैर-आपात सेवाएं प्रभावित, CM मान ने बातचीत के लिए बुलाया
पंजाब में लंबित महंगाई भत्ते (डीए) के बकाये के भुगतान की मांग को लेकर गुरुवार को सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों ने ‘महाहड़ताल’ शुरू कर दी। विभिन्न कर्मचारी संगठनों की संयुक्त एक्शन कमेटी के आह्वान पर हो रही इस हड़ताल में करीब 7.50 लाख कर्मचारी और पेंशनर शामिल होने की संभावना है। कर्मचारियों ने सामूहिक आकस्मिक अवकाश लेकर अपने-अपने विभागों के कार्यालयों के बाहर धरना और प्रदर्शन किया।
कर्मचारी संगठनों ने साफ किया है कि आंदोलन के दौरान सड़कों को जाम नहीं किया जाएगा और निजी प्रतिष्ठान सामान्य रूप से खुले रहेंगे। राखी से एक दिन पहले होने के कारण पीआरटीसी बसों का संचालन भी सामान्य रहने की बात कही गई है। हालांकि सरकारी स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, कार्यालयों और अस्पतालों में गैर-आपात सेवाओं पर हड़ताल का असर देखने को मिल रहा है। आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को आंदोलन से बाहर रखा गया है।
सुबह 9 बजे से ही कर्मचारी विभिन्न सरकारी कार्यालयों के बाहर जुटने लगे। चंडीगढ़ में मुख्य सचिवालय और सेक्टर-17 में बड़ी संख्या में कर्मचारियों के प्रदर्शन की संभावना है। राज्य के अन्य जिलों में भी सरकारी कार्यालयों के बाहर कर्मचारियों ने नारेबाजी कर सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
लुधियाना में हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। जिला प्रशासन का कामकाज लगभग ठप रहा और डीसी, एसडीएम, तहसीलदार, शिक्षा तथा ट्रांसपोर्ट विभाग के कार्यालयों में कर्मचारी नजर नहीं आए। डीसी ऑफिस एम्प्लाइज एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास जुनेजा के मुताबिक मिनी सचिवालय में तैनात सभी 1,267 कर्मचारी हड़ताल पर हैं।
पंजाब स्टेट मिनिस्टीरियल सर्विसेज यूनियन के वरिष्ठ नेता सुनील कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय और अन्य विश्वविद्यालयों समेत लुधियाना के विभिन्न विभागों से भी पूर्ण हड़ताल की सूचना मिल रही है।
महाहड़ताल के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान ने संयुक्त एक्शन कमेटी के नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया है। यह बैठक पहले चंडीगढ़ स्थित पंजाब भवन में प्रस्तावित थी, लेकिन मुख्यमंत्री के जालंधर में पहले से तय कार्यक्रमों के कारण अब बैठक पंजाब आर्म्ड पुलिस (पीएपी) परिसर में होगी। माना जा रहा है कि सरकार कर्मचारियों के सामने लंबित डीए भुगतान को लेकर कोई प्रस्ताव रख सकती है।
सूत्रों के अनुसार सरकार बकाया डीए पर 6 प्रतिशत ब्याज देने और मूल राशि के भुगतान के लिए कुछ अतिरिक्त समय मांगने पर विचार कर रही है। हालांकि कर्मचारी संगठनों ने संकेत दिया है कि केवल ब्याज देने या भुगतान को आगे टालने का प्रस्ताव उन्हें स्वीकार नहीं होगा।
कर्मचारियों और पेंशनरों का लंबित डीए बकाया करीब 15,000 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। आर्थिक दबाव का सामना कर रही पंजाब सरकार के लिए इतनी बड़ी राशि का तत्काल भुगतान करना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि सरकार वित्तीय संकट का हवाला देकर उनके वैध बकाये का भुगतान टाल रही है, जबकि दूसरी ओर सब्सिडी और विभिन्न वित्तीय सहायता योजनाओं पर लगातार खर्च किया जा रहा है।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कर्मचारियों और पेंशनरों की इतनी बड़ी लामबंदी आम आदमी पार्टी सरकार के लिए राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कर्मचारी और पेंशनर राज्य के बड़े संगठित मतदाता समूहों में शामिल हैं और उनके परिवारों को जोड़ने पर यह मुद्दा बड़ी संख्या में मतदाताओं को प्रभावित कर सकता है।
ऐसे में गुरुवार की महाहड़ताल सरकार के लिए सिर्फ एक दिन सरकारी कामकाज प्रभावित होने का मामला नहीं है। यह कर्मचारियों में बढ़ते असंतोष को दूर करने और करीब 15,000 करोड़ रुपये के डीए बकाये के मुद्दे को आगामी विधानसभा चुनाव में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने से रोकने की सरकार की क्षमता की भी परीक्षा है।
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