कंडी क्षेत्र अब पिछड़ा नहीं रहा: मान सरकार ने नहरी पानी ऊंचे इलाकों तक पहुंचाय, बोले गोयल कहा, सभी गारंटियां बिना किसी भेदभाव के पूरी की जा रही हैं, 10 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज और 600 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा पूरा किया
कंडी क्षेत्र अब पिछड़ा नहीं रहा: मान सरकार ने नहरी पानी ऊंचे इलाकों तक पहुंचाय, बोले गोयल कहा, सभी गारंटियां बिना किसी भेदभाव के पूरी की जा रही हैं, 10 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज और 600 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा पूरा किया
खबर खास, चंडीगढ़/काठगढ़ (एसबीएस नगर)-
पंजाब के जल संसाधन एवं भूमि व जल संरक्षण मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने आज कहा कि भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार हर क्षेत्र में अपने वादे निभा रही है और सभी गारंटियां बिना किसी भेदभाव के पूरी की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रहे कंडी क्षेत्र में मान सरकार ने सिंचाई के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है और अर्ध-पहाड़ी इलाके को खेती योग्य अवसरों में बदल दिया है।
मान सरकार ने 214 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई काठगढ़ लिफ्ट सिंचाई योजना के माध्यम से पहली बार नहरी पानी को ऊंचे इलाकों तक पहुंचाया है। उन्होंने आम आदमी पार्टी सरकार की किसान-हितैषी नीतियों पर ज़ोर देते हुए कहा कि इस परियोजना से पानी का बेहतर उपयोग होगा, बड़े स्तर पर ढांचागत निवेश होगा और किसानों को राहत देने के साथ उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार लाने की दूरदर्शी सोच को मज़बूती मिलेगी।
इस ऐतिहासिक कदम के तहत बरिंदर कुमार गोयल ने आज 214 करोड़ रुपये की लागत से तैयार काठगढ़ लिफ्ट सिंचाई योजना का उद्घाटन किया। इस योजना के माध्यम से पहली बार नहरी पानी को ऊंचे क्षेत्रों तक सफ़लतापूर्वक पहुंचाया गया है, जिससे कंडी क्षेत्र की सूखी और वर्षा पर निर्भर भूमि को सिंचाई सुविधाएं प्राप्त होंगी।
उन्होंने बताया कि इस परियोजना से लगभग 33 गांवों की 11,500 एकड़ भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी, जिससे कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी और किसानों की आय में इजाफ़ा होगा। यह पहल क्षेत्र की कृषि तस्वीर को बदलने में मील का पत्थर साबित होगी और किसानों को बेहतर फ़सलें उगाने के साथ-साथ भूमि की कीमत बढ़ाने में भी मदद करेगी।
उद्घाटन के बाद जन सभा को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा, “काठगढ़ लिफ्ट सिंचाई योजना कंडी नहर सिस्टम और बिस्त-दोआब प्रणाली के माध्यम से, ऊंचाई के कारण सिंचाई से वंचित क्षेत्रों को सिंचाई सुविधा प्रदान करने का एक ऐतिहासिक प्रयास है। इस परियोजना से क्षेत्र को बहुत लाभ होगा और भूजल पर दबाव भी कम होगा।”
उन्होंने आगे बताया कि इस परियोजना को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। पहला चरण 67 करोड़ रुपये की लागत वाला फरवरी 2026 में पूरा हो चुका है, जिसके तहत 13 गांवों के 4,000 एकड़ क्षेत्र को कवर किया गया है। दूसरा चरण 107 करोड़ रुपये की लागत वाला सितंबर 2026 तक पूरा होने की संभावना है, जिसमें 14 गांवों के 5,500 एकड़ क्षेत्र को शामिल किया जाएगा, जबकि तीसरा चरण से 40 करोड़ रुपये में 6 गांवों के 2,000 एकड़ क्षेत्र को सिंचाई सुविधा दी जाएगी। इसके साथ ही बिजली के बोझ को कम करने के लिए 650 किलोवाट का सोलर प्लांट भी स्थापित किया गया है।
तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने बताया कि इस योजना को बिस्त-दोआब नहर से जोड़ा गया है, जिसकी जल वहन क्षमता 67 क्यूसेक है। इसके तहत पंपों के माध्यम से पानी को ऊपर उठाकर ऊंचे-नीचे और अर्ध-पहाड़ी क्षेत्रों में विस्तृत पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए पहुंचाया जाएगा। पंप हाउस के लिए विभाग की मौजूदा भूमि का उपयोग किया गया, जिससे भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं पड़ी।
इस परियोजना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि भूजल स्तर में गिरावट और ट्यूबवेलों के बंद होने के कारण कंडी क्षेत्र के किसान वर्षा पर निर्भर हो गए थे, जिससे फसली विविधता और उत्पादन सीमित था। अर्ध-पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण पारंपरिक नहर प्रणाली पहले संभव नहीं थी, जिससे भूमि की कीमतें भी कम थीं। इस परियोजना को डिजाइन करने के लिए आधुनिक सैटेलाइट और ड्रोन सर्वेक्षण किए गए और आईआईटी रुड़की तथा आईआईटी रोपड़ में तकनीकी कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया, जिसके बाद इसे छह महीनों के भीतर युद्ध स्तर पर लागू किया गया।
उन्होंने आगे बताया कि इस परियोजना से पहले बलाचौर क्षेत्र के 72 गांवों में 28,205 एकड़ भूमि पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध थी, जो अब बढ़कर 105 गांवों की 39,705 एकड़ भूमि तक पहुंच जाएगी। खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए लगभग 94,000 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई गई है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मंत्री ने कहा कि राज्य ने सिंचाई ढांचे को मज़बूत करने और निर्बाध नहरी पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अब तक 6700 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। पहले जहां केवल 22 प्रतिशत पानी का उपयोग होता था, अब यह बढ़कर 78 प्रतिशत हो गया है। नहरों की मज़बूती से भूजल स्तर में सुधार, बिजली की खपत में कमी और मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि हुई है।
कंडी नहर के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि यह नहर तलवाड़ा से बलाचौर तक जाती है, जिसकी कुल लंबाई 129.035 किलोमीटर और जल वहन क्षमता 463 क्यूसेक है। 1980 में शुरू होने के बावजूद पहले पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंचता था। सरकार ने पानी के निरंतर प्रवाह को सुनिश्चित किया, 1500 किलोमीटर पुरानी पाइपलाइनों की मरम्मत की, 300 किलोमीटर नई पाइपलाइन बिछाई और 120 किलोमीटर नहरों व खालों की री-लाइनिंग की, जिससे तीन दशकों बाद 12 ब्लॉकों की 1,28,740 एकड़ भूमि को लाभ मिला।
लोक-कल्याणकारी पहलों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार 10 लाख रुपये तक के बीमा कवर के साथ मुफ्त एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं और घरों को 600 यूनिट मुफ्त बिजली प्रदान कर रही है। लोगों से किए गए सभी वादे बिना किसी भेदभाव के पूरे किए जा रहे हैं।
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