अरोड़ा ने विदेशी और घरेलू मोर्चे पर ‘दोहरी असफलता’ का किया पर्दाफाश; अमेरिकी रिफाइनरी सौदे की तुलना भारत के एलपीजी संकट से की कहा, उत्पादन में गिरावट, खपत और आयात बढ़ने से ‘आत्मनिर्भर’ दावे का हुआ पर्दाफाश
अरोड़ा ने विदेशी और घरेलू मोर्चे पर ‘दोहरी असफलता’ का किया पर्दाफाश; अमेरिकी रिफाइनरी सौदे की तुलना भारत के एलपीजी संकट से की कहा, उत्पादन में गिरावट, खपत और आयात बढ़ने से ‘आत्मनिर्भर’ दावे का हुआ पर्दाफाश
खबर खास, चंडीगढ़ :
पंजाब के कैबिनेट मंत्री और आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रधान अमन अरोड़ा ने आज भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए इसे विदेशी और घरेलू मामलों में “पूरी तरह विफल” करार दिया। सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच स्पष्ट अंतर को उजागर करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को “विश्व गुरु” और “आत्मनिर्भर” बनाने के दोनों वादे खोखले साबित हुए हैं।
पंजाब विधानसभा में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री लाल चंद कटारूचक्क द्वारा पेश किए गए निंदा प्रस्ताव में भाग लेते हुए अमन अरोड़ा ने आज के अखबारों में सामने आ रहे विरोधाभास की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा,
“अखबारों में एक ओर गैस एजेंसियों के बाहर किलोमीटर लंबी कतारों की खबरें थीं, हजारों होटल बंद होने की कगार पर पहुंच चुके हैं, अनगिनत शादियां रद्द हो रही हैं और हमारी माताएं-बहनें अपनी रसोई को लेकर चिंतित हैं। वहीं दूसरी ओर भारत सरकार का ‘आपका घर हमारी पहली प्राथमिकता’ शीर्षक के तहत पूरे पन्ने का विज्ञापन छपा हुआ था, जो केवल लोगों को दिलासा देने की कोशिश जैसा लगता है। असलियत यह है कि ऐसा विज्ञापन जारी करके उन्होंने खुद स्वीकार किया है कि स्थिति गंभीर है और दिन-प्रतिदिन और गंभीर होती जा रही है।”
उन्होंने सदन को 2014 से पहले के नरेंद्र मोदी के चुनावी भाषणों की याद दिलाई, जिनमें देश को आत्मनिर्भर बनाने और दुनिया का नेतृत्व करने की बात कही जाती थी। उन्होंने कहा,
“चौदह साल पहले वे घोषणा करते थे कि 140 करोड़ भारतीय दुनिया का नेतृत्व करेंगे और हमें कभी आयात की जरूरत नहीं पड़ेगी। आज देखिए हम कहां खड़े हैं। वे भारत को विश्व गुरु बनाने और देश को आत्मनिर्भर बनाने में बुरी तरह असफल रहे हैं।”
अमन अरोड़ा ने कहा कि 12 वर्ष सत्ता में रहने के बाद भी भाजपा नेतृत्व वाली सरकार अभी तक मित्र और विरोधी में फर्क नहीं कर सकी है। उन्होंने कहा कि एक-एक करके लगभग सभी पड़ोसी देश भारत से दूर होते गए हैं और चीन के साथ उनकी नजदीकियां बढ़ रही हैं, जो विदेश नीति की असफलता को दर्शाता है।
उन्होंने प्रधानमंत्री के हालिया इज़राइल दौरे पर भी सवाल उठाते हुए कहा,
“वे इज़राइल जाते हैं, वहां प्रधानमंत्री नेतन्याहू को गले लगाते हैं और अगले ही दिन अमेरिका और इज़राइल ईरान की शीर्ष राजनीतिक और प्रशासनिक नेतृत्व पर कार्रवाई कर देते हैं।”
उन्होंने सदन को अमेरिका-इज़राइल द्वारा एक स्कूल पर किए गए भयावह हमले की भी याद दिलाई, जिसमें सैकड़ों बच्चों की मौत हुई थी। उन्होंने कहा कि इस घटना पर भी प्रधानमंत्री की ओर से उन मासूम बच्चों के लिए कोई शब्द नहीं कहा गया।
केंद्र सरकार के 12 वर्षों के आंकड़ों का हवाला देते हुए अमन अरोड़ा ने कहा कि प्राकृतिक गैस का उत्पादन 2012 में 40.68 बीसीएम से घटकर 2024 में 35 बीसीएम रह गया है, जबकि इसी अवधि में खपत 47 बीसीएम से बढ़कर 69 बीसीएम हो गई है।
इसी तरह कच्चे तेल का घरेलू उत्पादन 2013-14 में 37 मिलियन मीट्रिक टन से घटकर 2023-24 में 29 मिलियन मीट्रिक टन रह गया है, जबकि खपत 158 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर 233 मिलियन मीट्रिक टन हो गई है।
उन्होंने कहा कि भारत की एलपीजी आयात निर्भरता 2014 में 45 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 66 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने कहा, “यही उनका ‘आत्मनिर्भर भारत’ है! आज हम अपनी रसोई गैस का दो-तिहाई हिस्सा आयात करते हैं। उत्पादन घट रहा है, खपत तेजी से बढ़ रही है और वे आत्मनिर्भरता की बात करते हैं। यह आत्मनिर्भरता नहीं बल्कि बढ़ती निर्भरता है।”
अमन अरोड़ा ने अमेरिका में एक बड़े रिफाइनरी समझौते का भी जिक्र किया, जिसे भारत की सबसे बड़ी निजी ऊर्जा कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के एक ट्वीट का हवाला दिया, जिसमें भारत और रिलायंस के “जबरदस्त निवेश” के लिए धन्यवाद देते हुए कहा गया कि इससे वैश्विक निर्यात को मजबूती मिलेगी और अमेरिका में ईंधन तथा रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
मंत्री ने कहा, “एक ओर देश के 140 करोड़ लोग एलपीजी सिलेंडरों के लिए कतारों में खड़े हैं। दूसरी ओर उनका ‘सबसे अच्छा दोस्त’ अमेरिका के साथ अरबों डॉलर का रिफाइनरी समझौता किया जा रहा है। एक तरफ हमारी माताएं रोटी नहीं पका पा रही हैं और दूसरी तरफ भारतीय धन से दुनिया को तेल देने के लिए रिफाइनरियां बनाई जा रही हैं। क्या देश के लिए इससे ज्यादा अपमानजनक स्थिति हो सकती है?”
उन्होंने पंजाब के लोगों को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार उनके हितों की रक्षा के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी। तेल और एलपीजी क्षेत्र पर केंद्र के नियंत्रण के बावजूद सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात काम करेगी कि प्रदेश के लोगों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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