भारतीय स्क्वैश में बदलाव की मांग—मास पार्टिसिपेशन से ही तैयार होंगे भविष्य के चैंपियन
भारतीय स्क्वैश में बदलाव की मांग—मास पार्टिसिपेशन से ही तैयार होंगे भविष्य के चैंपियन
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भारत के पूर्व नंबर-1 स्क्वैश खिलाड़ी Saurav Ghosal ने देश की उभरती युवा स्टार Anahat Singh के लिए बड़ी उम्मीदें जताते हुए कहा है कि दुनिया की टॉप-10 में जगह बनाना उनके लिए “न्यूनतम लक्ष्य” होना चाहिए। हालांकि, उन्होंने साथ ही यह भी साफ किया कि इतनी कम उम्र में खिलाड़ी पर अनावश्यक दबाव डालना ठीक नहीं है।
घोषाल ने अनाहत को “दुर्लभ प्रतिभा” बताते हुए कहा कि उनके पास स्किल, फिटनेस और मानसिक मजबूती का बेहतरीन संतुलन है। उन्होंने कहा कि अनाहत का गेम लगभग पूरा है—वह कोर्ट पर तेजी से प्रतिक्रिया देती हैं, विविध शॉट्स खेलती हैं और मुश्किल परिस्थितियों में भी संयम बनाए रखती हैं। यही गुण उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाते हैं।
उन्होंने अनाहत के मजबूत सपोर्ट सिस्टम को भी उनकी सफलता का बड़ा कारण बताया। फ्रांस के पूर्व वर्ल्ड नंबर-1 Grégory Gaultier, अनुभवी कोच Stéphane Galifi और खुद घोषाल की मेंटरशिप उन्हें एक आदर्श माहौल प्रदान कर रही है। घोषाल के मुताबिक, “इससे बेहतर गाइडेंस किसी खिलाड़ी को नहीं मिल सकता।”
हालांकि, घोषाल का मानना है कि भारतीय स्क्वैश को केवल एक-दो स्टार खिलाड़ियों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने देश में गहराई (bench strength) की कमी की ओर इशारा करते हुए कहा कि टॉप खिलाड़ियों को बेहतर बनाने के लिए उनके पीछे मजबूत प्रतिस्पर्धा होना जरूरी है।
उन्होंने मिस्र जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां शीर्ष खिलाड़ी रोज एक-दूसरे के साथ खेलते हैं, जिससे उनका स्तर लगातार ऊंचा होता है। इसी तर्ज पर घोषाल ने भारत में “मास पार्टिसिपेशन मॉडल” लागू करने की वकालत की। उनका सुझाव है कि देश के हर स्कूल में बच्चों को कम उम्र में स्क्वैश से परिचित कराया जाए।
घोषाल ने कहा कि अगर ज्यादा बच्चे इस खेल को आजमाएंगे, तो उनमें से ही भविष्य के चैंपियन निकलेंगे। उन्होंने Kendriya Vidyalaya जैसे स्कूलों को स्क्वैश के “सैटेलाइट सेंटर” के रूप में विकसित करने की बात कही।
अपने करियर के अनुभव साझा करते हुए घोषाल ने कहा कि अब उनके लिए सफलता सिर्फ जीत-हार तक सीमित नहीं रही। उनके अनुसार, असली संतुष्टि उस सफर में है, जिसे खिलाड़ी अपने जुनून के साथ तय करता है।
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