विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं, रचनात्मक सुझाव देने की बजाय वॉकआउट की राजनीति कर रही कांग्रेस
विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं, रचनात्मक सुझाव देने की बजाय वॉकआउट की राजनीति कर रही कांग्रेस
खबर खास, चंडीगढ़ :
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि आज प्रदेश की जनता देख रही है जिस प्रकार कांग्रेस के विधायक सदन में झूठ बोलकर सदन से वॉक आउट कर जाते हैं। कांग्रेस की फितरत रही है कि आरोप लगाओ और भाग जाओ। उन्होंने शायराना अंदाज में कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जो अपने आप को नहीं संभाल सकते वो घर को क्या संभालेंगे। हम पर झूठे आरोप लगाकर वह भाग जाते हैं। विपक्ष का यह रवैया दुर्भाग्यपूर्ण है।
मुख्यमंत्री मंगलवार को हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बजट अनुमान 2026—27 पर चर्चा के उपरांत जवाब दे रहे थे।
कांग्रेस विधायकों द्वारा सदन से वॉकआउट करने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्षी सदस्य पता नहीं किस चश्मे से बजट को देख रहे हैं। विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है। केवल अखबारों की सुर्खियों में बने रहने के लिए बजट पर निराधार टिप्पणियां कर रहे हैं। विपक्ष ने बजट को गंभीरता से नहीं पढ़ा उन्हें यही नहीं पता कि बजट में विकास के लिए क्या-क्या प्रावधान किए गए हैं तो वे प्रदेश की समस्याओं पर कैसे चर्चा कर सकते थे। जो सड़क पर आरोप लगाते हैं, उन्हीं आरोपों को सदन में बोल देते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा के 2 करोड़ 80 लाख लोग इस महान सदन की तरफ आशा भरी नजर से देखते हैं, परंतु विपक्ष का यह गैरजिम्मेदाराना रवैया हरियाणा प्रदेश के लोग देख रहे हैं। विपक्ष को रचनात्मक सुझाव नहीं देने है, बल्कि झूठ बोलकर के सदन से भाग जाना है, यही विपक्ष की सोच है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कांग्रेस की भूमिका चिंताजनक है। विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है, केवल हाजिरी लगवानी है, विरोध करना है और झूठ फैलाना है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि— जो खुद चल नहीं पाते रास्तों पर, अक्सर वही मंजिलों पर सवाल करते हैं।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष की मजबूरी है, क्योंकि विपक्ष को खुद सरकार के खिलाफ खड़ा हुआ दिखाई देना पड़ता है। पर काश, वे जनहित में कोई रचनात्मक सुझाव भी देते, कम से कम उनके हलके के लोग तो उन्हें हल्के में न लेते।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. रघुबीर कादियान को बजट भाषण बहुत लंबा लगा, इन्होंने कहा कि बजट स्पीच 3 घंटे 9 मिनट की थी, यह विधानसभा का एक रिकॉर्ड है। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. रघुबीर कादियान सबसे सीनियर सदस्य हैं। इस सदन के अध्यक्ष भी रहे हैं। वे बताएं कि क्या बजट अभिभाषण को समय सीमा तय करने के लिए कोई फार्मूला है या क्या कांग्रेस के कार्यकाल में इसकी कोई समय सीमा तय की गई थी। इसे घंटों व मिनटों में तोलकर ऐसे अपमानित न करें। श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि मेरा यह दूसरा बजट प्रदेश के सभी हितधारकों के सुझावों को मिलाकर बनाया गया था।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस विधायकों द्वारा राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया प्रभावित करने के संबंध में कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने एक प्रत्याशी श्री संजय भाटिया को जीता कर दिल्ली भेजने का काम किया है। लोकतंत्र में हर व्यक्ति को चुनाव लड़ने का अधिकार है। हमने निर्दलीय उम्मीदवार को स्पोर्ट किया। विपक्ष भी अपना उम्मीदवार खड़ा कर लेते, क्यों नहीं खड़ा किया। निर्दलीय उम्मीदवार हमारे पास वोट मांगने के लिए आया तो हमने उसे स्पोर्ट किया, इसमें विपक्ष को आपत्ति क्या है। डॉ रघुबीर कादियान ने आज भी चुनाव जीत कर भी चुनावी प्रक्रिया को कांड बताया, वोट चोरी की बात की। जबकि सच्चाई यह है कि न वोट चोरी होती है, न ईवीएम में मोरी होती है, लोकतंत्र की यही तो खूबी है जनाब, जगा देती है अंतरआत्मा, अगर वो सो रही होती है। इस प्रकार के आरोप लगाना यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. रघुबीर कादियान द्वारा आरोप लगाया गया कि प्री-बजट परामर्श बैठक केवल बड़े उद्योगपतियों और व्यापारियों के साथ ही कीं। जबकि किसानों और किसान संगठनों से कोई संवाद नहीं किया गया। श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि यह आरोप सरासर गलत है। गत 15 जनवरी को हिसार स्थित चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में प्री-बजट परामर्श बैठक मैंने की थी। इसमें 362 किसान, किसान संगठनों के प्रतिनिधियों, एफपीओ, प्रगतिशील किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और कृषि शोधकर्ताओं ने भाग लेकर अपने सुझाव दिए। इसके अतिरिक्त, गत 22 जनवरी को कुरुक्षेत्र में आयोजित प्री-बजट परामर्श बैठक में भी भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और किसानों से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण सुझाव रखे। इसलिए यह कहना कि सरकार केवल उद्योगपतियों से मिलकर बजट बना रही है, न केवल तथ्यहीन है बल्कि उन हजारों किसानों, किसान संगठनों और विशेषज्ञों के योगदान का भी अपमान है, जिन्होंने अपनी मेहनत और अनुभव से बहुमूल्य सुझाव दिए। यह बजट किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि किसान, मजदूर, युवा, महिला, उद्योग और समाज के हर वर्ग की भागीदारी से तैयार किया गया है।
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